*प्रकृति का कहर : तिब्बत सीमा से आई बाढ़ ने नेपाल में मचाई तबाही, कई गांव और हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट बहे*

 

एजेंसी अपडेट

*काठमांडू*

नेपाल में तिब्बत सीमा से लगे पहाड़ी क्षेत्र में अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। बाढ़ के तेज बहाव में कई गांवों और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के बहने की खबर है। इस प्राकृतिक आपदा में 28 पुलिसकर्मियों के लापता होने की सूचना है। प्रशासन ने बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान की आशंका जताई है। राहत एवं बचाव कार्य के लिए पुलिस और सेना की टीमें तैनात कर दी गई हैं।

अधिकारियों के अनुसार, रसुवा जिले के स्याप्रुबेसी और तिमुरे इलाके बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। भोटे कोशी नदी के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी के बाद नदी किनारे बसे क्षेत्रों में खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने नदी के आसपास रहने वाले लोगों से तत्काल सतर्कता बरतने और सुरक्षित एवं ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की है।

गांवों और परियोजना स्थलों को नुकसान:
जिला प्रशासक नरेंद्र परियार ने बताया कि कई गांवों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट साइट्स के बाढ़ में बह जाने की सूचना मिली है। हालांकि, अभी तक नुकसान का आधिकारिक और पुख्ता आकलन नहीं हो सका है। उन्होंने कहा कि जान-माल का नुकसान काफी अधिक हो सकता है, लेकिन राहत एवं बचाव कार्य पूरा होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

पुलिस और सेना ने संभाला मोर्चा :
नेपाल सरकार ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया है। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस और सेना की टीमों को राहत एवं बचाव कार्य में लगाया गया है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की ओर से लोगों को नदी के किनारे जाने से बचने और लगातार सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

भारत की ओर बहती है नदी :
भोटे कोशी नदी तिब्बत से निकलकर नेपाल में प्रवेश करती है और आगे त्रिशूली नदी में मिलती है। त्रिशूली नदी आगे भारत में गंडक नदी के रूप में बहती है। ऐसे में नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में आई बाढ़ का असर निचले इलाकों में भी देखने को मिल सकता है।

पिछले साल भी आई थी विनाशकारी बाढ़:
भोटे कोशी नदी क्षेत्र में पिछले वर्ष भी विनाशकारी बाढ़ आई थी। उस दौरान नौ लोगों की मौत हुई थी, जबकि 24 लोग लापता हो गए थे। बाढ़ में नेपाल और चीन को जोड़ने वाला फ्रेंडशिप ब्रिज भी बह गया था, जिसके चलते कई महीनों तक दोनों देशों के बीच परिवहन और व्यापार प्रभावित रहा था।

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