ओबीसी समुदाय की समस्याओं के समाधान के लिए मुख्यमंत्री को दिया ज्ञापन

 

जयप्रकाश बहुगुणा

उत्तरकाशी/देहरादून

 

भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रदेश सह संयोजक लक्ष्मण सिंह भंडारी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल ने ओबीसी समुदाय की विभिन्न समस्याओं के समाधान को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया है!ज्ञापन के माध्यम से कहा गया है कि प्रदेश में ओबीसी समाज अभी भी अत्यंत पिछड़ा है, राजकीय सेवाओं के अलावा अन्य क्षेत्रों में इस वर्ग का उचित प्रतिनिधित्व न होने के कारण विकास की मुख्य धारा से नहीं जुड़ पा रहा है, पर्वतीय क्षेत्रों में निवासरत ओबीसी समाज अन्य आरक्षण प्राप्त करने वाले समाज की तुलना में मूलभूत सुविधाओं से वंचित है, हमारे संविधान के मूल अधिकारों में समता के अधिकारियों के तहत सरकारी सेवाओं के अतिरिक्त अन्य क्षेत्रों में उचित प्रतिनिधित्व देने के प्रावधान को सम्मिलित किया गया है। वर्तमान में सरकार द्वारा जो ओबीसी आरक्षण तय किया गया है उससे हमारे वर्ग की स्थिति में कोई सकारात्मक परिवर्तन नहीं हो पाया है, लगभग 25 साल पूर्व बने उत्तराखंड राज्य में तब और अब की ओबीसी समाज की जनसंख्या में बहुत वृद्धि हुई है, देश के प्रधानमंत्री के छोटे भाई प्रह्लाद मोदी ने भी अपने देवभूमि उत्तराखंड की यात्रा पर नवंबर सन् 2017 में ओबीसी समाज की सरकारी सेवा में 27% आरक्षण की पैरवी की है। महंगाई लगातार बढ़ रही है और सालाना आय का मानक काफी पहले से ही निर्धारित है, वर्तमान में इसे संशोधित करने की जरूरत है इसलिए क्रीमीलेयर की सीमा बढ़ाने की आवश्यकता है।ज्ञापन में कहा गया है कि सरकारी सेवा भर्ती में ओबीसी आरक्षण चौदह प्रतिशत से बढ़ाकर सताइस प्रतिशत करने का कष्ट करेंगे ।अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण निदेशालय का गठन किया जाए।ओबीसी क्रीमीलेयर का दायरा बढ़ाया जाए।ओबीसी आयोग का ढ़ांचा पुनर्गठित किया जाए। अन्य पिछड़ा वर्ग के सभी बच्चों को सरकारी व निजी स्कूलों सहित एसटी व एससी के बच्चों की भांति कक्षा एक से कक्षा आठ तक छात्रवृत्ति दी जाए तथा आईएएस व पीसीएस की फ्री कोचिंग दी जाए। व्यवसायिक शिक्षा में एससी व एसटी की भांति ऋण की सुविधा दी जाए आदि मांगे शामिल है!इस अवसर पर राजेश बिजल्वाण व डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन उत्तराखंड की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती सुधा कुकरेती जो प्रदेश में हाल ही में फार्मासिस्टों के 536 पद मृत घोषित किए गए हैं उन्हें पुनर्जीवित करने की लड़ाई लड़ी रही हैं मौजूद रहे!ज्ञापन में आग्रह किया गया है कि अधिकांश विषय पर ओबीसी आयोग की सिफारिश भी आपके सादर संज्ञान है, विश्वास है आप जल्द ही हमारे ओबीसी समाज की उक्त न्यायोचित मांगों को स्वीकृति देने की सिफारिश करेंगे!

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