उत्तरकाशी : हिंदी दिवस के पूर्व दिवस पर राजकीय  महाविधालय बड़कोट में हुआ विचार गोष्ठी का आयोजन

 

जयप्रकाश बहुगुणा

बड़कोट/उत्तरकाशी

 

राजेंद्र सिंह रावत राजकीय महाविद्यालय, बड़कोट में हिंदी विभाग के तत्वावधान में हिंदी दिवस के पूर्व दिवस पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की मूल भावना “हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और अस्मिता की पहचान है।” कार्यक्रम का शुभारंभ स्वागत संबोधन के साथ हुआ। इसके पश्चात हिंदी विभाग के प्रभारी डी. पी. गैरोला ने हिंदी दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा में हिंदी को राजभाषा का दर्जा प्रदान किया गया था। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा: “हिंदी हमारे विचारों की सहज अभिव्यक्ति की भाषा है। यह भाषा भारत की आत्मा है, जिसे आत्मसात करना हम सभी का नैतिक कर्तव्य है। हिंदी केवल एक विषय नहीं, बल्कि हमारी चेतना का हिस्सा है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में श्री अविनाश शुक्ला अजीम प्रेमजी फाउंडेशन से उपस्थित रहे जिन्होंने सभी छात्र-छात्राओं को हिंदी दिवस की शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कहा कि अजीम प्रेमजी फाउंडेशन द्वारा 2025–26 में ₹30000 प्रतिवर्ष छात्रवृत्ति दी जा रही है जिसका उद्देश्य ग्रामीण व सरकारी स्कूलों से पढ़ रही छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहयोग देना है” “प्रभारी प्राचार्य डॉ. रश्मि उनियाल ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा: “हिंदी केवल राजभाषा नहीं, बल्कि जन-जन की भाषा है। इसकी स्वीकृति और सम्मान तभी बढ़ेगा जब हम इसे अपने व्यवहारिक जीवन में अपनाएँगे। इस अवसर पर महाविद्यालय की वरिष्ठ प्राध्यािपिका डॉ. अंजु भट्ट ने अपने विचार रखते हुए कहा: “हिंदी भावों की भाषा है, जो हृदय को सीधे स्पर्श करती है। विद्यार्थियों को इसमें केवल पढ़ाई तक सीमित न रहकर रचनात्मक लेखन और अभिव्यक्ति में भी आगे आना चाहिए।” डॉ. जगदीश चंद्र रस्तोगी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि “हिंदी भाषा का विकास एक लंबी और संघर्षपूर्ण यात्रा रही है। यह भाषा जनभावनाओं की सजीव अभिव्यक्ति बनकर उभरी है और आज भी राष्ट्र की आत्मा का प्रतिनिधित्व करती है। इसी क्रम में डॉ. बी. एल. थपलियाल ने कहा: “हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना का माध्यम है। इसका प्रयोग प्रशासन, शिक्षा और संचार में बढ़ाना राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक सशक्त कदम होगा। डॉ. संगीता रावत ने कहा: “हिंदी साहित्य ने भारतीय जनमानस को जोड़ने का कार्य किया है। इसका संवेदनशील पक्ष आज भी सामाजिक बदलावों के संदर्भ में उतना ही प्रासंगिक है।” डॉ. लीलावती नित्वाल ने कहा “हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं का संबंध परस्पर सहयोग का है, न कि प्रतिस्पर्धा का। विविध भाषाओं में संवाद ही भारतीय संस्कृति की सुंदरता है। डॉ. दिनेश शाह ने कहा “आज के तकनीकी युग में हिंदी को डिजिटल माध्यमों से जोड़ना आवश्यक है। हमें गर्व होना चाहिए कि हमारी भाषा में विश्व को जोड़ने की क्षमता है डॉ. पुष्पेन्द्र सेमवाल ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा:”हिंदी भाषा का साहित्य, संस्कृति और समाज से गहरा संबंध है। इसकी समृद्ध परंपरा को युवाओं तक पहुँचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।” कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ श्रीकांत चौधरी सहित समस्त प्राध्यापक कर्मचारी एवं विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लेकर कार्यक्रम को सफल बनाया।

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