जयप्रकाश बहुगुणा
उत्तरकाशी
राम चंद्र उनियाल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय उत्तरकाशी में जनजातीय गौरव दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया, जिसमें प्रभारी प्राचार्य डॉ. एम.पी.एस. परमार ने जौनसार-बावर की जौनसारी जनजाति तथा हिमालयी क्षेत्रों की भोटिया जनजाति की विशिष्ट संस्कृति, परंपराओं, सामाजिक पहचान और उत्तराखण्ड के विकास में उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जौनसारी समुदाय की लोकसंस्कृति, नृत्य-गीत, वेशभूषा तथा सामाजिक प्रथाएँ राज्य की सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, वहीं भोटिया जनजाति व्यापारिक परंपरा, ऊनी उत्पाद, औषधीय ज्ञान और सीमांत क्षेत्रों में साहसिक जीवनशैली के लिए जानी जाती है। इस अवसर पर संयोजक डॉ. गंभीर सिंह तोमर ने भी जौनसारी जनजाति की लोकपरंपराओं, सामाजिक व्यवस्थाओं, पर्व-त्योहारों तथा जौनसार-बावर की विशिष्ट पहचान पर विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की और बताया कि जौनसारी समाज की सांस्कृतिक धरोहर उत्तराखण्ड की समृद्ध विविधता का महत्वपूर्ण अंग है। कार्यक्रम में पर्वतारोही बचेंद्री पाल की उपलब्धियों को जनजातीय समाज का गौरव बताया! इस अवसर पर पर्वतारोही बचेंद्री पाल की ऐतिहासिक उपलब्धि का उल्लेख करते हुए कहा गया कि उन्होंने पूरे जनजातीय समाज और उत्तराखण्ड का गौरव बढ़ाया है। कार्यक्रम में जनजातीय महान विभूतियों बिरसा मुंडा, एकलव्य एवं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के जीवन और राष्ट्रहित में उनके योगदान पर भी जानकारी दी गई, कार्यक्रम में नोडल अधिकारी डॉ. पवेंद्र सिंह, संयोजक डॉ. गंभीर सिंह तोमर, डॉ. रोशनी रावत, डॉ. विनोद कुमार, डॉ. कैलाश रावत, डॉ. गिरीश सिंह विष्ट, डॉ. नरेंद्र सिंह, सुखदेव सिंह सहित अनेक प्राध्यापक एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित