राजा रघुनाथ ट्रस्ट द्वारा श्रीराम के जलाभिषेक के लिए अयोध्या पहुंचाया गंगा और यमुना का जल

– श्रीराजा रघुनाथ मंदिर ट्रस्ट कोटी मणपा पट्टी ठकराल द्वारा श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर बीते वर्ष की भांति इस वर्ष भी अयोध्या पहुंचाया गंगा और यमुना का जल

उत्तराखंड एक्सप्रेस ब्यूरो
बड़कोट (उत्तरकाशी) ।

सदियों के त्याग, तपस्या और असंख्य रामभक्तों की आस्था के प्रतीक श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के शुभ अवसर पर विगत वर्ष की भांति इस वर्ष भी श्री माहसू देवता राजा रघुनाथ मंदिर ट्रस्ट के ओर से गंगा और यमुना का जल जलाभिषेक के लिए तथा केदारपात्रि, ब्रहम कमल व गूगल मासी आदि हवन यज्ञ के लिए अयोध्या पहुंचाया गया है। जल व अन्य सामग्री पहुंचाने में श्री राजा रघुनाथ महासू महाराज जी के पुजारी, माली व बजीर शामिल थे।

अयोध्या में श्रीराम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगाँठ, प्रतिष्ठा द्वादशी में पहुंचे राजा रघुनाथ कोटी मनपा थोक ठकराल पट्टी के ट्रस्ट के माध्यम पूर्व वर्ष की भांति गंगा, यमुना का जल जलाभिषेक के लिए जल को चंपत राय श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अयोध्या के महामंत्री को भेट किया।

राजा रघुनाथ के बजीर महादेव चौहान ने बताया की हमें ट्रस्ट के लोगों ओर से अध्यक्ष त्रेपन सिंह चौहान, महासचिव मानेंद्र चौहान, कोषाध्यक्ष सोबन सिंह के निर्देश के क्रम में राजा रघुनाथ महासु देवता ट्रस्ट के सदस्या द्वारा अयोध्या भेजे जाने की योजना बनाई। प्रतिष्ठा द्वादशी के कार्यक्रम में समलित होने के लिए राजा रघुनाथ महासु के पुजारी माली जयदेव सेमवाल व बजीर सहित तीन लोग शामिल हैं।

अयोध्या में 31 दिसंबर 2025 को राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगाँठ, ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाई जा रही है तथा यह उत्सव 2 जनवरी, 2026 तक चलेगा। अयोध्या के महामंत्री चंपतराय जी को गंगा, यमुना जल को सौंपा गया, चंपत राय जी के द्वारा राजा रघुनाथ महासू देव के माली पुजारी जयदेव सेमवाल जी, एवं राजा रघुनाथ के बजीर महदेव सिंह चौहान को प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव कार्यक्रम में गर्भगृह की पूजा में श्रीराम बालरूप राम के जलाभिषेक के लिए उत्तराखंड से यमुनोत्री ओर गंगोत्री से पवित्र जल लाया गया एवं मंदिर के परिसर के हवन यज्ञ कुंड में हिमालय की चोटियों में आलौकित यज्ञ सामग्री केदार काँठा में केदारपति और गुगल मासी, देवदार के वृक्ष की लकड़ी जैसे हवन के लिए उपयोगी होती है। राजा रघुनाथ के माली के द्वारा रामल्ला को भेट की जा रही, हवन यज्ञ सामग्री के बारे में आदरणीय चंपत राय ने इसके गुण रहस्यों को जाना और सभी बैठे लोगों को अपनी वाणी से इस गुण व रहस्यों को बताया।

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