
उत्तराखंड Express ब्यूरो
ऋषिकेश
14 मार्च को विश्वभर में मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय गणित दिवस के अवसर पर श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय के पं. एल. एम. एस. परिसर, ऋषिकेश के गणित विभाग द्वारा दिनांक 14 मार्च 2026 विश्वविद्यालय के गणित विभाग द्वारा “Mathematics and Hope” विषय पर एक रोचक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में गणित के प्रति रुचि बढ़ाना तथा गणित की उपयोगिता और सुंदरता को समझाना था।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कन्नौज से पधारे प्रो. सुशील शाक्य थे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि गणित केवल संख्याओं और सूत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तार्किक सोच, विश्लेषणात्मक क्षमता और समस्या-समाधान की शक्ति को विकसित करता है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि गणित विज्ञान, प्रौद्योगिकी और आधुनिक जीवन के लगभग हर क्षेत्र की आधारशिला है, इसलिए छात्रों को इसे उत्साह और जिज्ञासा के साथ सीखना चाहिए। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहेगा, जिससे विद्यार्थियों में गणित के प्रति रुचि बढ़ेगी और वे ज्ञान तथा अनुसंधान के क्षेत्र में नई उपलब्धियाँ प्राप्त करने के लिए प्रेरित होंगे।
इस अवसर पर गणित विभागाध्यक्ष प्रो. अनीता तोमर ने अपने संबोधन में कहा कि 14 मार्च को विश्वभर में मनाया जाने वाला यह दिवस गणित के प्रसिद्ध स्थिरांक पाई (π) के प्रथम तीन अंकों 3.14 का प्रतिनिधित्व करता है। इसी कारण इस दिन को पाई डे के रूप में भी जाना जाता है। उन्होंने बताया कि पाई का महत्व गणित, विशेष रूप से ज्यामिति और विज्ञान के अनेक क्षेत्रों में अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह वृत्त की परिधि और व्यास के अनुपात को दर्शाता है तथा भौतिकी, अभियांत्रिकी, खगोल विज्ञान और आधुनिक प्रौद्योगिकी सहित अनेक वैज्ञानिक गणनाओं में इसका व्यापक उपयोग होता है। प्रो. तोमर ने आगे बताया कि पाई डे का पहला आयोजन वर्ष 1988 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को स्थित एक्सप्लोरेटोरियम में किया गया था, जहाँ वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों ने गणित की महत्ता को रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से मनाया। बाद में गणित के वैश्विक महत्व को ध्यान में रखते हुए 2019 में यूनेस्को ने 14 मार्च को आधिकारिक रूप से अंतरराष्ट्रीय गणित दिवस (International Day of Mathematics) घोषित किया। इसका उद्देश्य विश्वभर में गणित के प्रति जागरूकता बढ़ाना, विद्यार्थियों को प्रेरित करना तथा समाज में गणित की भूमिका को रेखांकित करना है। उन्होंने कहा कि गणित केवल संख्याओं, समीकरणों और सूत्रों का विषय नहीं है, बल्कि यह हमारे चारों ओर मौजूद प्रकृति, तकनीक और दैनिक जीवन में दिखाई देने वाले विभिन्न पैटर्न, संरचनाओं और नियमों को समझने का एक शक्तिशाली माध्यम है। गणित के अध्ययन से विद्यार्थियों में तार्किक सोच, विश्लेषणात्मक क्षमता, रचनात्मकता और समस्या-समाधान की दक्षता विकसित होती है, जो उन्हें जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करने में सहायता करती है। प्रो. तोमर ने यह भी कहा कि गणितीय सोच हमें कठिन और जटिल परिस्थितियों में भी धैर्यपूर्वक विचार करने और उचित समाधान खोजने की प्रेरणा देती है। यही कारण है कि इस वर्ष के अंतरराष्ट्रीय गणित दिवस का विषय “Mathematics and Hope” रखा गया है, जो यह संदेश देता है कि गणित ज्ञान, नवाचार और प्रगति के माध्यम से समाज में नई आशा और संभावनाएँ उत्पन्न करता है। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने सभी प्रतिभागियों को प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक और बौद्धिक कार्यक्रम विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, ज्ञान बढ़ाने और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे और उन्हें गणित के प्रति और अधिक उत्साहित करेंगे।
अंत में प्रो. दीपा शर्मा ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों तथा उपस्थित विद्यार्थियों का हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक एवं बौद्धिक कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक होते हैं, क्योंकि इनके माध्यम से उन्हें अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित करने, नए ज्ञान को ग्रहण करने तथा स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने का अवसर मिलता है। उन्होंने मुख्य अतिथि, संकाय सदस्यों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता के लिए विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया। प्रो. शर्मा ने कहा कि गणित केवल एक विषय नहीं, बल्कि आशा और संभावनाओं का प्रतीक है। गणित हमें यह सिखाता है कि किसी भी जटिल समस्या का समाधान धैर्य, तर्क और निरंतर प्रयास के माध्यम से अवश्य खोजा जा सकता है। यही सोच विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और सकारात्मक दृष्टिकोण का निर्माण करती है। उन्होंने यह भी कहा कि गणित के अध्ययन से विद्यार्थियों में तार्किक चिंतन, विश्लेषणात्मक क्षमता और रचनात्मकता का विकास होता है, जो उन्हें जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को गणित की रोचकता और उसकी उपयोगिता को समझने का अवसर प्रदान करते हैं, जिससे उनमें विषय के प्रति नई ऊर्जा, जिज्ञासा और उत्साह का संचार होता है।
प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और गणित से जुड़े विभिन्न रोचक प्रश्नों का उत्तर दिया। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद “लीलावती” टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि “आर्यभट्ट” टीम द्वितीय स्थान पर रही।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एन. के. जोशी ने अपने संदेश के माध्यम से कार्यक्रम के सफल आयोजन पर हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित कीं तथा गणित विभाग के इस सराहनीय प्रयास की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक और बौद्धिक कार्यक्रम विश्वविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण को समृद्ध करते हैं तथा विद्यार्थियों में ज्ञान के प्रति जिज्ञासा, शोध की प्रवृत्ति और नवाचार की भावना को प्रोत्साहित करते हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि ऐसे आयोजन भविष्य में भी निरंतर होते रहेंगे और विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा को निखारने के साथ-साथ उच्च अध्ययन एवं अनुसंधान की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे।
कार्यक्रम में डॉ. गौरव वार्ष्णेय, डॉ. पवन जोशी, विभाग के शोधार्थी सजल, मोनिका सती, नितिन गुप्ता, रश्मि राय, शिवानी, प्रियंका, गीता, स्नातकोत्तर एवं स्नातक के विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने कार्यक्रम की सराहना की और इसे ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक बताया।