*उत्तरकाशी : “किताबें करती हैं बाते” जी आई सी कण्डारी में विश्व पुस्तक दिवस के अवसर पर एक प्रेरक एवं अनूठी पहल*

जयप्रकाश बहुगुणा 

*नौगांव /उत्तरकाशी*

राजकीय इंटर कॉलेज कण्डारी, नौगांव- उत्तरकाशी में “विश्व पुस्तक दिवस” के अवसर पर “एक कोना कक्षा का” पहल के अंतर्गत नन्हें बच्चों के साथ पुस्तकों के महत्व पर एक सुंदर एवं प्रेरक लघु कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में बच्चों की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने पूरे वातावरण को ज्ञान और सृजनात्मकता से भर दिया।

विद्यालय में इस अभिनव पहल की शुरुआत गत वर्ष धाद संस्था- देहरादून एवं कण्डारी गांव के मूल निवासी सुभाष गौड़ (मुंबई में स्थापित व्यवसायी) के सहयोग से की गई थी। “एक कोना कक्षा का” के माध्यम से विद्यालय में एक छोटे लेकिन सजीव पुस्तकालय एवं वाचनालय की स्थापना की गई, जिसमें समग्र शिक्षा उत्तराखंड, अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन और धाद संस्था का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

इस पुस्तकालय की विशेष बात यह है कि इसका संचालन एवं रख-रखाव स्वयं छोटे बच्चों द्वारा किया जाता है। बच्चों का पंजिका में नामांकन एवं घर के लिए निःशुल्क पुस्तकें वितरित की जाती हैं। अब तक सैकड़ों पुस्तकों का आदान- प्रदान हो चुका है, जो बच्चों में पढ़ने की आदत और जिज्ञासा को निरंतर बढ़ा रहा है। पाठ्य पुस्तकों के साथ-साथ बच्चे कहानी, कविता, पत्रिकाओं और दैनिक समाचार पत्रों का भी यहां आनंद लेते हैं, जिससे उनका बौद्धिक एवं रचनात्मक विकास हो रहा है। खाली समय और अवकाश के क्षण अब बच्चों के लिए यह ज्ञानवर्धन और कुछ विशेष मनोरंजन खेलों का सुंदर संगम बन गया है।

कार्यक्रम के दौरान कला शिक्षक एवं रंगकर्मी सुरक्षा रावत के मार्गदर्शन में बच्चों ने प्रसिद्ध रंगकर्मी सफ़दर हाशमी की चर्चित कविता..

“किताबें करती हैं बातें
बीते ज़मानों की,
दुनियां की, इंसानों की,
आज की, कल की,
एक-एक पल की…!”
की भावपूर्ण एवं शानदार प्रस्तुति दी, जिसने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों व्यक्तित्व विकास, साक्षरता के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा पढ़ने की आदत को विकसित करना रहा।

विद्यालय के प्रधानाचार्य नरेश रावत ने इस ख़ास दिन पर कहा कि “विश्व पुस्तक दिवस हमें यह याद दिलाता है कि किताबें केवल ज्ञान का स्रोत नहीं हैं, बल्कि वे हमारे इतिहास, संस्कृतिक विरासत, विचारों और अनुभवों को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम भी हैं।”

कविता प्रस्तुति में शिवन्या, श्रुति, आस्था, विजय, हर्ष, आकर्ष, शिवांश, अक्षत, किशन, सोबिन, वेदांश, आरभ, लवंश, धीरज, दिव्यांशु, सार्थक, जयकिशन, अलीशा, कनिका, सिमरन, आराध्या, अंशिका एवं किरण, राधिका आदि बच्चों की सराहनीय सहभागिता रही। इस अवसर पर बच्चों के साथ विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं।यह पहल न केवल बच्चों में पढ़ने की रुचि को बढ़ा रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर, जागरूक और सृजनशील बनाने की दिशा में भी एक सशक्त कदम साबित हो रही है!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *