रूपनौल सौड़ में खेली गई माखन-दूध की होली

– रूपनौल सौड़ में खेली माखन-दूध की होली, राधा-कृष्ण की झांकी रही आकर्षण का केंद्र, सैकड़ों श्रद्धालुओं ने लिया बटर फेस्टिवल का आनंद

बड़कोट( उत्तरकाशी)

विकासखंड नौगांव के अंतर्गत बाबा बौखनाग टिब्बा के समीप स्थित रूपनौल सौड़ के खूबसूरत बुग्याल में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ बटर फेस्टिवल का आयोजन किया गया। इस दौरान माखन और दूध की होली खेली गई। राधा-कृष्ण की आकर्षक झांकी और दही की हांडी फोड़ने का कार्यक्रम उत्सव का मुख्य आकर्षण रहा। कार्यक्रम में रंवाई घाटी सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे।

बटर फेस्टिवल की शुरुआत बाबा बौखनाग महाराज की विधिवत पूजा-अर्चना से हुई। इसके बाद रूपनौल सौड़ में स्थानीय देवी-देवताओं और देवी मात्रिकाओं की पूजा-अर्चना कर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव मनाया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दूध, दही, माखन और मिश्री का भोग लगाया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की।

जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित बटर फेस्टिवल में राधा-कृष्ण की मनमोहक झांकी आकर्षण का केंद्र रही। श्रद्धालुओं ने दही की हांडी फोड़ी और माखन-मिश्री का प्रसाद ग्रहण किया। बुग्याल में माखन और दूध की होली खेलकर श्रद्धालुओं ने कृष्ण जन्मोत्सव की खुशियां मनाईं।

रूपनौल सौड़ में रंवाई घाटी के मुंगरसांति, दशगी, भंडारस्यूं, बड़कोट संती सहित विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। कई श्रद्धालुओं ने यहां रात्रि प्रवास किया और शुक्रवार को जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हुए। रातभर श्रीकृष्ण जागरण के साथ भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ, जबकि दिन में महिला और पुरुषों ने उत्सव में भाग लेकर तांदी नृत्य सहित विभिन्न पारंपरिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।

सैकड़ों एकड़ में फैला है खूबसूरत बुग्याल

रूपनौल सौड़ अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए भी खास पहचान रखता है। यहां सैकड़ों एकड़ में फैले बुग्याल के बीच बांज, बुरांश, खीर्सू, मोरू सहित विभिन्न प्रजातियों के पेड़-पौधे पर्यावरण को और खूबसूरत बनाते हैं। प्राकृतिक वातावरण के बीच आयोजित होने वाला बटर फेस्टिवल श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए धार्मिक आस्था के साथ-साथ आकर्षण का केंद्र भी बन रहा है।

कार्यक्रम में कफनौल निवासी सूरत सिंह पंवार, वीरेंद्र पंवार, चंद्रशेखर पंवार, सत्येश्वर प्रसाद, हरदेव पंवार, सुभाष चंद्र, वीरेंद्र अवस्थी, जवाहर सिंह रमोला, मानवेंद्र कफोला, जगमोहन राणा, प्यार सिंह रावत, सोहन बटियाटा, रमेश असवाल, सरिता वर्धन, दिलू लाल, द्रवेश बिजल्वाण, रामसुदामा, राजेंद्र अवस्थी, राजेंद्र प्रसाद, प्रदीप बिजल्वाण, राजेश, बासुदेव, नरेश भट्ट, प्रमोद बिज्वाण, सूर्य बल्ब सहित विभिन्न गांवों के जनप्रतिनिधि, ग्रामीण, श्रद्धालु और पर्यटक मौजूद रहे।

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