रवांई घाटी के लाल धान पर बारिश का संकट, खेतों में तैयार फसल को नुकसान का डर

– लाल धान की कटाई के ऐन वक्त मौसम ने बढ़ाई किसानों की चिंता, कटी घास भी भीगने से पशुचारे का संकट गहराया;

उत्तराखंड एक्सप्रेस ब्यूरो

उत्तरकाशी

रवांई घाटी क्षेत्र में शनिवार को हुई लगातार बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। इन दिनों क्षेत्र के किसान प्रसिद्ध लाल धान की कटाई की तैयारी में जुटे हुए हैं। लाल धान की फसल पूरी तरह पककर तैयार है, जबकि कई किसानों ने अगेती किस्म के धान की कटाई कर फसल को खेतों में ही मड़ाई के लिए तैयार कर रखा है। ऐसे में अचानक हुई बारिश से खेतों में खड़ी और कटी हुई दोनों तरह की फसल पर नुकसान का खतरा मंडराने लगा है।

बारिश के कारण खेतों में कटकर रखी धान की फसल के भीगने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। यदि मौसम लगातार खराब रहा तो नमी के कारण धान की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ ही फसल के खराब होने की आशंका है। वहीं, कटाई के लिए तैयार लाल धान की फसल के गिरने और बालियों से दाने झड़ने का खतरा भी किसानों को सता रहा है।

पशुचारे पर भी बारिश की मार

इन दिनों किसान शीतकालीन मौसम के लिए पशुओं का चारा जुटाने में भी व्यस्त हैं। खेतों और आसपास के क्षेत्रों से काटकर रखी गई घास बारिश में भीग गई है। किसानों के अनुसार अब इस घास को पूरी तरह सुखाने में करीब 15 दिन तक का समय लग सकता है। पर्याप्त धूप नहीं मिलने पर घास के सड़ने और खराब होने का खतरा बना हुआ है, जिससे आने वाले दिनों में पशुचारे की समस्या खड़ी हो सकती है।

किसान ओमप्रकाश गैरोला, नवीन गैरोला, रमेश असवाल, जगमोहन, स्यालिक राम नौटियाल और हकूमत सिंह ने बताया कि सितंबर का अंतिम दौर धान की कटाई और मड़ाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस समय बारिश किसानों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। उन्होंने कहा कि यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो खेतों में काटकर रखी धान की फसल के साथ ही पककर तैयार लाल धान को भी नुकसान पहुंच सकता है।

किसानों का कहना है कि इस समय उन्हें बारिश के बजाय साफ और धूप वाले मौसम की जरूरत है, ताकि समय रहते धान की कटाई-मड़ाई पूरी की जा सके और पशुओं के लिए शीतकालीन चारे का संरक्षण भी किया जा सके। किसानों ने उम्मीद जताई कि मौसम जल्द साफ हो और फसलों को नुकसान से बचाया जा सकेगा।

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