*गढ़ भोज दिवस :  उत्तराखण्ड की पारंपरिक खाद्य विरासत को मिला नया मंच, श्रीनगर में होगा राज्य स्तरीय मुख्य आयोजन, विद्यालयों-महाविद्यालयों से लेकर विदेशों तक गूंजेगा गढ़ भोज का संदेश*

 

जयप्रकाश बहुगुणा 

उत्तरकाशी

 

इस वर्ष गढ़ भोज दिवस की थीम गढ़ भोज – स्वस्थ उत्तराखंड की ओर एक सशक्त कदम।
उत्तराखण्ड की पारंपरिक फसलों, पौष्टिक स्थानीय भोजन और समृद्ध खाद्य विरासत को नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से 7 अक्टूबर 2026 को गढ़ भोज दिवस मनाया जाएगा। वर्ष 2000 से संचालित गढ़ भोज अभियान की निरंतरता में आयोजित होने वाला यह दिवस अब उत्तराखण्ड की खाद्य संस्कृति को नई पीढ़ी से जोड़ने वाला व्यापक जन-अभियान बन चुका है।

इस वर्ष गढ़ भोज दिवस का मुख्य आयोजन श्रीनगर गढ़वाल के रामलीला मैदान में प्रातः 11 बजे आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तराखण्ड सरकार के विद्यालयी शिक्षा, संस्कृत शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत जी होंगे।

गढ़ भोज दिवस के अवसर पर उत्तराखण्ड के पारंपरिक अनाजों, स्थानीय व्यंजनों और खाद्य परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ-साथ स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने, किसानों की आय के अवसर बढ़ाने और स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ राज्य भर के शिक्षा संस्थानों में विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी।

गढ़ भोज अभियान के प्रणेता द्वारिका प्रसाद सेमवाल ने बताया कि वर्ष 2022 से प्रत्येक वर्ष 7 अक्टूबर को गढ़ भोज दिवस मनाया जा रहा है। उत्तराखण्ड सरकार के सहयोग से इस वर्ष भी राज्य के विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में गढ़ भोज दिवस मनाया जा रहा है। शिक्षा विभाग द्वारा संस्थानों को आयोजन के लिए दिशा-निर्देश जारी करने के साथ कार्यक्रमों की रिपोर्ट भी मांगी गई है।

उन्होंने बताया कि गढ़ भोज दिवस अब उत्तराखण्ड तक सीमित नहीं है। अमेरिका, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड सहित विभिन्न देशों में रह रहे प्रवासी उत्तराखंडी भी इस वर्ष गढ़ भोज दिवस के आयोजन से जुड़ेंगे। इसका उद्देश्य दुनिया के विभिन्न हिस्सों में रह रहे उत्तराखंडियों को अपनी पारंपरिक खाद्य विरासत से जोड़ना है।

*विशेष कार्यक्रम*

गढ़ भोज दिवस के इस विशेष अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के सार्वजनिक जीवन एवं राष्ट्र सेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर उनकी सार्वजनिक यात्रा एवं राष्ट्र सेवा से जुड़े विषयों की जानकारी भी साझा की जाएगी।

द्वारिका प्रसाद सेमवाल ने कहा कि गढ़ भोज केवल भोजन नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की मिट्टी, खेती, संस्कृति, जैव विविधता, स्वास्थ्य और स्थानीय आजीविका से जुड़ी हमारी सामूहिक विरासत है। इसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाना और स्थानीय उत्पादों को सम्मान एवं बाजार दिलाना हम सभी की जिम्मेदारी है। सरकार के द्वारा गढ़ भोज दिवस को मान्यता देने के लिए धन्यवाद।

कार्यक्रम विवरण

दिनांक: 7 अक्टूबर 2026
समय: प्रातः 11:00 बजे
स्थान: रामलीला मैदान, श्रीनगर गढ़वाल

आयोजक

हिमालयन पर्यावरण जड़ी-बूटी एग्रो संस्थान ‘जाड़ी’, उत्तरकाशी
एवं
पर्वतीय विकास शोध केंद्र, श्रीनगर
समाजशास्त्र एवं समाज कार्य विभाग तथा मानव विज्ञान विभाग
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर गढ़वाल

संपर्क:
द्वारिका प्रसाद सेमवाल
प्रणेता गढ़ भोज अभियान
डॉ. अरविंद दरमोड़ा — नोडल अधिकारी
मो.: 9411148872 | 7310810469
“गढ़ भोज—हमारी थाली में उत्तराखण्ड की विरासत, खेतों में समृद्धि और भविष्य के लिए स्वस्थ जीवन।”
डॉ अरविंद दरमोड़ा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *