उत्तराखंड Express ब्यूरो
कर्णप्रयाग /चमोली
डॉ.शिवानंद नौटियाल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कर्णप्रयाग में 20 और 21 फरवरी 2026 को दर्शन दिवस के अवसर पर दो दिवसीय सेमिनार का समापन किया गया। भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद (ICPR) द्वारा संपोषित इस दो दिवसीय सेमीनार में सम्पूर्ण देश के विभिन्न क्षेत्रों से ऑनलाइन ऑफलाइन माध्यम से 60 से अधिक शोधार्थियों ने अपने शोध पत्रों का वाचन किया।
21 फरवरी को द्वितीय दिवस के अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में रूप में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.शिक्षा सेमवाल ने अपने संबोधन में कहा कि प्राचीन और मध्यकालीन भारत हर दृष्टि से आत्मनिर्भर ही था उस समय भारत की सकल आय अन्य देशों से अधिक थी और हर व्यक्ति भारत में आने के लिए लालायित रहता था वह एक आत्मनिर्भरता का ही प्रतीक था। विशिष्ट वक्ता के रूप में झांसी महाविद्यालय उत्तरप्रदेश के प्रोफेसर कमलेश ने बताया कि आत्मनिर्भरता और सतत विकास एक सिक्के के दो पहलू हैं। सतत विकास के माध्यम से ही हम आत्म निर्भर भारत की ओर बढ़ सकते हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर राम अवतार सिंह ने बताया कि दो दिवसों में यह संगोष्ठी एक सफल संगोष्ठी रही। इन शोध पत्रों के माध्यम से हम निश्चित तौर पर आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ेंगे। संगोष्ठी में महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.एम. एस. कंडारी, डॉ. आर.सी. भट्ट, डॉ. चंद्रमोहन जंसवांण आदि अन्य प्राध्यापकों द्वारा भी अपने शोध पत्रों का वाचन किया गया। राष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक डॉ. मृगांक मलासी ने बताया कि मीडिया के माध्यम से सभी शोध पत्रों को प्रचारित और प्रसारित किया जाएगा। कार्यक्रम का संचालन डॉ. वी. आर. अंथवाल द्वारा किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक ,कर्मचारी तथा अन्य स्थानों से शोधार्थी मौजूद रहे।