जयप्रकाश बहुगुणा
बडकोट/उत्तरकाशी
ब्यापार मंडल बडकोट द्वारा आयोजित पावन प्रज्ञा पुराण कथा के दूसरे दिन का नौ कुण्डीय गायत्री यज्ञ के साथ श्रद्धालुओं ने भजनों का भी गायन किया।शुक्रवार सुबह कार्यक्रम का शुभारंभ
नौ कुण्डीय गायत्रीयज्ञ से किया गया ।यज्ञ के माध्यम से श्रद्धालुओं ने क्षेत्र की सुख शान्ति के लिये हवन कुंड में आहुति डाली गई शक्तिपीठ के व्यवस्थापक सुनील शर्मा ने पावन प्रज्ञा पुराण कथा पर प्रवचन करते हुए कहा कि प्रज्ञा पुराण कथा में 18 पुराणों का सार है। धार्मिक, नैतिक अथवा आध्यात्मिक कथाओं से मनुष्य का नैतिक उत्थान होता है। सुनील शर्मा ने बताया कि प्रज्ञा पुराण के चार खंड हैं। प्रथम खंड लोक कल्याण जिज्ञासा प्रकरण से शुरू होता है। यह प्राणी को आत्मबोध कराता है। द्वितीय खंड मानव जीवन को स्वार्थ से उठकर परमार्थ की प्रेरणा देता है। तृतीय खंड में परिवार निर्माण, नारी जागरण, शिशु निर्माण और वसुधैव कुटुंबकम का पाठ पढ़ाया जाता है। वहीं चतुर्थ खंड में भारतीय संस्कृति के जागरण का संदेश है। कथाव्यास ने कहा कि प्रज्ञा पुराणा कथा का शुभारंभ देवर्षि नारद और भगवान विष्णु के संवाद से होता है। प्रज्ञा पुराण में वसुधैव कुटुंबकम को स्पष्ट करते हुए कहा कि विश्व परिवार की परिधि बहुत विशाल है। उसमें समस्त प्राणी आ जाते हैं।
कार्यक्रम में रामआश्रय चौहान, जयस्वरूप बहुगुणा, राधा बलभ नौटियाल, धनवीर रावत, सोहन, गैरोला, शांति बेलवाल, सुनील मनवाल,मदन पैन्यूली, मनोज, अग्रवाल, नरेश अग्रवाल, दिनेश चौहान , प्रदीप असवाल, महादेव उनियाल, अवतार सिंह, अजय सिंह, सहित बड़ी संख्या में कथा स्रोता उपस्थित रहे।