जयप्रकाश बहुगुणा
*बड़कोट/उत्तरकाशी*
शिक्षा जगत में अपनी अलग पहचान एवं ख्यातिलब्ध रंवाई क्षेत्र, ग्राम हिमरोल निवासी शिक्षक, साहित्यकार एवं सामाजिक चिंतक डॉ. नेत्रमणि बडोनी को शिक्षा में उत्कृष्टता की श्रेणी में प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रीय शिक्षा रत्न सम्मान 2025’ से सम्मानित किया गया है। यह राष्ट्रीय स्तर का सम्मान ग्लोबल आइकॉन्स ऑफ इंडिया ई-मैगज़ीन द्वारा शिक्षा, शैक्षणिक नेतृत्व और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में उनके निरंतर योगदान के लिए प्रदान किया गया है।
डॉ. बडोनी ने अपना अब तक का संपूर्ण जीवन शिक्षा के लिए समर्पित किया है। इनके द्वारा निजी एवं सरकारी विभिन्न शिक्षा के केन्द्रों में आदर्श मूल्य-आधारित और समावेशी शिक्षा को सुदृढ़ करने में लिए अभूतपूर्व योगदान दिया है। शिक्षा, अंग्रेज़ी साहित्य, पत्रकारिता और मानवाधिकारों में सुदृढ़ शैक्षणिक पृष्ठभूमि के साथ उन्होंने शैक्षिक सुधार, संस्थागत विकास और विद्यार्थियों के बौद्धिक उन्नयन हेतु निरंतर कार्य किया है। अनुशासन, शैक्षणिक उत्कृष्टता और नैतिक शिक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें विद्यार्थियों, शिक्षकों और बौद्धिक जगत में व्यापक सम्मान दिलाया है। राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न शिक्षा एवं समाज सेवा से जुड़े सेमिनारों तथा विचार गोष्ठियों में प्रतिभागिता एवं पुरस्कार इनके राष्ट्रीय स्तर के विचारक होने के परिचायक हैं। ये सिद्धांतवादी कर्त्तव्यपरायण पृष्ठभूमि के शिक्षक हैं, तथा दिखावे के नहीं बल्कि वास्तविक धरातलीय कार्य एवं9 परिवर्तनों के लिए लोकप्रिय हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में इनका योगदान विद्यार्थी जीवन से ही रहा है, इन्हें पढ़ने और पढ़ाने में बहुत आनंद आता था, और उच्च शिक्षा ग्रहण करने के साथ ही साथ इन्होंने कुछ समय बड़कोट तथा बाद में देहरादून यमुनोत्री राजमार्ग पर स्थित डामटा नामक स्थान पर अपना निजी विद्यालय संचालित करना प्रारंभ कर दिया। जहां इन्होंने ग्रामीण अंचलों से आने वाले बच्चों के भविष्य को बड़ी सिद्दत से संवारने का कार्य किया। पढ़ाने के अतिरिक्त लेखन में गहरी रुचि रखने के कारण जैसे ही स्नातक की शिक्षा पूर्ण हुई, इन्होंने पत्रकारिता में डिप्लोमा कोर्स करने के पश्चात विभिन्न समाचार पत्र-पत्रिकाओं में कार्य कर निष्पक्ष, स्वच्छ एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर पत्रकारिता के लोकप्रिय रहे हैं। इतना ही नहीं सामाजिक जागरूकता के ध्येय से डाॅ० बडोनी ने भारतीय मानवाधिकार संस्थान नई दिल्ली से तीन वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कोर्स पूर्ण कर सामाजिक चेतना एवं मानवीय सरोकार की जागरूकता जैसे कार्यों में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान करते रहे हैं।
वर्ष 2005 में राजकीय इंटर कालेज गेंवला (ब्रह्मखाल) उत्तरकाशी से स०अ० एल० टी० के पद से राजकीय सेवा में पदार्पण करने के पश्चात, वर्ष 2011 में प्रवक्ता अंग्रेजी के पद एवं प्रभारी प्रधानाचार्य के रूप में रा०इ० का० चौंरा थलीसैंण पौड़ी गढ़वाल में विद्यालय के चहुंमुखी विकास तथा शैक्षिक प्रतिमानों के साथ अपना अभूतपूर्व योगदान दिया है, जिसके लिए समस्त ढाईज्यूली पट्टी/राठ क्षेत्र पौड़ी के लोग इन्हें आज भी याद करते हैं। रा०इ० का० चौंरा थलीसैंण से जनपद टिहरी थौलधार के सूदूर व सीमावर्ती अतिदुर्गम क्षेत्र में स्थित रा० इ० का० कटखेत में पारस्परिक स्थानांतरण के फलस्वरूप शिक्षक एवं लंबी अवधि तक प्रभारी प्रधानाचार्य के रूप में अपनी उत्कृष्ट शैक्षिक सेवाएं प्रदान की हैं।
वर्तमान में ये राजकीय इंटर कालेज सड़ब जौनपुर टिहरी गढ़वाल में प्रवक्ता अंग्रेजी के साथ ही साथ प्रभारी प्रधानाचार्य के रूप में पलायन के कारण न्यून छात्र संख्या वाले विद्यालय में छात्रोपयोगी विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित कर विद्यालय में नई जान व ऊर्जा के संचार करने का कार्य कर रहे हैं। डॉ० बडोनी एवं इनके कुछ सहयोगी अध्यापक/अध्यापिकाओं के द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर छात्र/छात्राओं सहित विद्यालय में सभी अध्ययनरत विद्यार्थियों को अपने व्यय पर संपूर्ण गणवेश- गर्म कोट-पैंट, सहित आई०डी० कार्ड, टाई, बेल्ट इत्यादि सामग्रियां वितरित कर हमेशा की तरह अपने सिद्धांतों के अनुरूप शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक तथा लोक कल्याणकारी कार्यक्रमों के माध्यम से समाजोत्थान करने में अपनी सहभागिता तथा सहयोग करने का पुनीत कार्य कर रहे हैं।
शिक्षा व समाजसेवा के अतिरिक्त, डॉ० बडोनी एक कवि, लेखक और जिम्मेदार पत्रकार के रूप में भी व्यापक रूप से प्रसिद्ध हैं। वे साहित्य और मीडिया को सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक मूल्यों, पर्यावरणीय जागरूकता और मानवाधिकारों के प्रसार का प्रभावी माध्यम मानते हैं। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में प्रकाशित उनके लेखन ने समकालीन शैक्षिक और सामाजिक मुद्दों के प्रति समाज को संवेदनशील बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ये राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न शैक्षिक सेमिनारों में प्रतिभाग कर शिक्षा, समाज सेवा एवं साहित्य जगत के नामचीन हस्तियों के बीच में अपनी विशिष्ट पहचान एवं ख्यातिप्राप्त शिक्षक हैं, जो हमेशा से ही शिक्षा की बेहतरी के लिए समर्पित हैं, इसका ताजा उदाहरण विगत 30 नवंबर 2025 को मेरठ में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार भी है जिसमें- ” राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका ” विषय पर अपनी साहित्यिक रचनाओं, लेख, कविताओं एवं शिक्षाप्रद उद्बोधनों के फलस्वरूप इन्हें “राष्ट्रीय गौरव सम्मान 2025” से भी पुरस्कृत किया गया है।
डॉ. बडोनी को इससे पूर्व विद्या वाचस्पति सम्मान, अटल बिहारी वाजपेई सेवा सम्मान और राष्ट्रीय गौरव सम्मान 2025 जैसे अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से भी सम्मानित किया जा चुका है, जो शिक्षा और समाज के प्रति उनके बहुआयामी योगदान को रेखांकित करते हैं। राष्ट्रीय शिक्षा रत्न सम्मान 2025 उनके एक समर्पित शिक्षाविद् और राष्ट्र-निर्माता के रूप में योगदान को और अधिक सुदृढ़ करता है, जिनका कार्य आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करता रहेगा।