डायट बड़कोट में कला शिक्षकों ने सीखी रिंगाल हस्तशिल्प की बारीकियां

उत्तराखंड एक्सप्रेस ब्यूरो
बड़कोट, उत्तरकाशी

जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) बड़कोट, उत्तरकाशी में कला शिक्षा को बढ़ावा देने और स्थानीय हस्तशिल्प को विद्यालयी शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया से जोड़ने के उद्देश्य से माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत कला शिक्षकों के लिए पांच दिवसीय ‘रिंगाल हस्तशिल्प’ प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों ने रिंगाल से विभिन्न उपयोगी एवं आकर्षक वस्तुएं तैयार करने की पारंपरिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।

प्रशिक्षण के शुभारंभ अवसर पर डायट के प्राचार्य संजीव जोशी ने कहा कि हस्तशिल्प आधारित गतिविधियां विद्यार्थियों में सृजनात्मकता, विश्लेषणात्मक सोच, समस्या समाधान क्षमता और व्यावहारिक कौशल विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय कला एवं हस्तशिल्प हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा हैं। शिक्षकों को चाहिए कि प्रशिक्षण में सीखी गई तकनीकों को विद्यालयों तक पहुंचाकर विद्यार्थियों को स्थानीय कला, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ें। कार्यक्रम समन्वयक गोपाल सिंह राणा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 तथा विद्यालयी शिक्षा हेतु राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा-2025 के संदर्भ में कला शिक्षा के महत्व को बताते हुए कहा कि कला शिक्षा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ विभिन्न विषयों को सरल एवं प्रभावी ढंग से समझाने में सहायक है।

पांच दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान कला शिक्षकों ने रिंगाल क्राफ्ट की विभिन्न तकनीकों का अभ्यास किया। प्रशिक्षणार्थियों ने रिंगाल से आकर्षक टोकरियां, पेन स्टैंड, फूलदान, ज्यामितीय आकृतियां तथा दैनिक उपयोग की अन्य वस्तुओं के साथ विभिन्न कलात्मक आकृतियां तैयार कीं। प्रशिक्षण के बाद शिक्षक इन तकनीकों का उपयोग कक्षा-कक्ष शिक्षण के साथ सह-पाठ्यचर्या गतिविधियों में भी कर सकेंगे, जिससे विद्यार्थियों के सीखने के अनुभव को अधिक रुचिकर, रचनात्मक और आनंददायक बनाया जा सकेगा।

इस मौके पर प्रशिक्षक के रूप में विनोद कुमार एवं प्रकाश लाल व संस्थान के संकाय सदस्य मो. अरशद अंसारी, टीकाराम सिंह रावत, बबिता सजवाण सहित अन्य उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *