*सात समंदर पार नीदरलैंड में गूंजेगा उत्तराखण्ड के पारंपरिक भोजन का स्वाद, दीपावली पर सजेगी गढ़ भोज की विशेष थाली, 200 से 300 भारतीय शेफ होंगे समारोह में शामिल*

 

जयप्रकाश बहुगुणा 
*उत्तरकाशी*

उत्तराखण्ड की समृद्ध खाद्य संस्कृति और पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू अब सात समंदर पार यूरोप में भी अपनी पहचान बना रही है। दीपावली के अवसर पर 2 नवंबर 2026 को नीदरलैंड के हूफडॉर्प स्थित जैक एंड जिल (Zack & Zill) में इंडियन क्यूलिनेरी सोसाइटी, नीदरलैंड्स एंड यूरोप (ICSNE) के तत्वावधान में *इंडियन शेफ्स दिवाली मिलन समारोह–2026* का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष समारोह का विशेष आकर्षण उत्तराखण्ड का पारंपरिक खानपान, गढ़ भोज और पहाड़ी संस्कृति होगी।

समारोह में जख्या आलू, पहाड़ी लाल चावल, भंगजीरे की चटनी, मंडुवे के चिप्स और प्याज के मंडुवे के पकौड़े सहित उत्तराखण्ड के अनेक पारंपरिक व्यंजन आकर्षण का केंद्र रहेंगे। इनके माध्यम से विदेश में रह रहे भारतीयों और अन्य अतिथियों को पहाड़ के पारंपरिक स्वाद, पोषण और खाद्य संस्कृति से परिचित कराया जाएगा।

इस आयोजन को सफल बनाने में शेफ पृथ्वी राणा, शेफ टीकाराम सिंह, शेफ आलम सिंह नेगी, शेफ त्रिलोक सिंह नेगी, शेफ हिमालय सिंह रावत, शेफ धर्म सिंह नेगी, शेफ शेर सिंह रावत, शेफ मोहन राणा, शेफ महिपाल सिंह राणा सहित अनेक शेफ और सहयोगी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। आयोजकों के अनुसार समारोह के लिए लगभग 200 से 300 भारतीय शेफ एवं अन्य आमंत्रित अतिथियों को निमंत्रण दिया गया है। सभी शेफ एक मंच और एक बैनर के नीचे एकत्रित होकर भारतीय खानपान की विविधता, उत्तराखण्ड के गढ़ भोज, पारंपरिक संस्कृति और संगीत का आनंद लेंगे।

हिमालयन पर्यावरण जड़ी-बूटी एग्रो संस्थान ‘जाड़ी’ वर्ष 2000 से उत्तराखण्ड के पारंपरिक एवं पौष्टिक भोजन को मुख्यधारा से जोड़ने तथा उसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए गढ़ भोज अभियान चला रहा है। संस्थान के प्रयासों से प्रेरित होकर दर्जनों उत्तराखण्डी शेफ विभिन्न देशों में पहाड़ के पारंपरिक व्यंजनों के प्रचार-प्रसार में जुटे हैं। नीदरलैंड में आयोजित होने वाला यह समारोह अभियान के अंतरराष्ट्रीय विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

हाल ही में आयोजित गढ़ भोज दिवस को भी व्यापक जनसमर्थन मिला। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखण्ड के लगभग 21 हजार शिक्षण संस्थानों में 15 लाख से अधिक विद्यार्थियों एवं आम नागरिकों ने प्रतिभाग किया। उत्तराखण्ड सरकार के शिक्षा विभाग ने इस आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इससे पारंपरिक फसलों, स्थानीय भोजन और नई पीढ़ी को अपनी खाद्य विरासत से जोड़ने के प्रयासों को नई मजबूती मिली है।

गढ़ भोज अभियान के प्रणेता द्वारिका प्रसाद सेमवाल ने कहा कि, “उत्तराखण्ड का पारंपरिक भोजन केवल स्वाद नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, प्रकृति, पोषण, परंपरा और पहाड़ की आर्थिकी का महत्वपूर्ण आधार है। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि गढ़ भोज अभियान से जुड़े और इससे प्रेरित शेफ दुनिया के विभिन्न देशों में उत्तराखण्ड के पारंपरिक भोजन को पहचान दिलाने का कार्य कर रहे हैं। नीदरलैंड में दीपावली के अवसर पर गढ़ भोज की विशेष थाली सजना इस बात का प्रमाण है कि हमारी स्थानीय खाद्य विरासत की वैश्विक स्तर पर भी विशेष पहचान बन सकती है। हमारा प्रयास है कि मंडुवा, झंगोरा, गहत, भट्ट, राजमा और अन्य पारंपरिक फसलों से तैयार पहाड़ी व्यंजन दुनिया की थाली तक पहुंचें और स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार मिले।”

यह समारोह केवल शेफों का मिलन नहीं, बल्कि भारतीय खानपान, सांस्कृतिक विरासत, आपसी सहयोग और उत्तराखण्ड की पहचान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने का एक सार्थक प्रयास है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *