
जयप्रकाश बहुगुणा
*नौगांव /उत्तरकाशी*
राष्ट्रीय जनसंख्या शिक्षा कार्यक्रम (NPEP) एवं राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) उत्तराखंड, देहरादून के तत्वावधान में निर्मित गढ़वाली चित्रगीत “बेटा बेटी एक समान” का भावपूर्ण लोकार्पण राजकीय इंटर कॉलेज कण्डारी, नौगांव उत्तरकाशी में किया गया। लोकभाषा, लोकसंस्कृति और सामाजिक चेतना से ओतप्रोत यह चित्रगीत बेटा और बेटी की समानता का सशक्त संदेश देता है। गीत के प्रत्येक दृश्य और शब्द में पहाड़ की संवेदनाएं, पारिवारिक संस्कार और बदलते समाज की सकारात्मक सोच सहज रूप से प्रतिबिंबित होती है।
चित्रगीत का फिल्मांकन विद्यालय परिसर एवं कण्डारी गांव की मनोहारी वादियों में किया गया है। इसमें प्रवक्ता रमेश लाल एवं सुरेन्द्र आर्यन ने अपनी प्रभावी भूमिका निभाई, जबकि बाल कलाकार मासूम नौटियाल, प्रेरित गौड़ एवं आरुषि ने अपनी स्वाभाविक अभिनय प्रतिभा से गीत को जीवंत बना दिया। इसके अतिरिक्त खुशी, कनिका, राधिका, मुस्कान, प्रिया व शिवांश सहित अन्य विद्यार्थियों, प्रवक्ता नितेश चौहान और विद्यालय परिवार का सहयोग भी उल्लेखनीय रहा।
विद्यालय की वर्चुअल लैब में विद्यार्थियों हेतु चित्रगीत के तीन विशेष शो आयोजित किए गए। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानाचार्य नरेश रावत ने किया। उन्होंने इस रचनात्मक उपलब्धि को विद्यालय और क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण बताते हुए पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होती, बल्कि कला, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों के माध्यम से भी बच्चों में संवेदनशीलता एवं सकारात्मक दृष्टि विकसित की जा सकती है।
चित्रगीत का संगीत निर्देशन डॉ. उषा कटियार ने किया है, जबकि मधुर स्वर प्रवक्ता ओम बधानी एवं प्रीति राणाकोटी ने दिए हैं। गीत के शब्द डॉ. ओम बधानी द्वारा लिखे गए हैं, जिनमें लोकजीवन की आत्मीयता और सामाजिक संदेश का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। फिल्मांकन एवं तकनीकी संयोजन का दायित्व शिक्षक सुरक्षा रावत एवं प्रदीप चमोली ने संवेदनशीलता और रचनात्मकता के साथ निभाया। गीत की रिकॉर्डिंग देहरादून स्थित आरती म्यूजिकल्स में संपन्न हुई। यह चित्रगीत अब यूट्यूब पर भी उपलब्ध है।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षक सुरक्षा रावत ने बच्चों को फिल्मांकन, संपादन और तकनीकी प्रक्रियाओं की महत्वपूर्ण जानकारियां भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि भविष्य में विद्यालय के विद्यार्थियों को साथ लेकर इसी प्रकार के शैक्षिक, सांस्कृतिक एवं आंचलिक विषयों पर आधारित गीतों और लघु फिल्म का निर्माण निरंतर किया जाएगा, ताकि शिक्षा के साथ रचनात्मकता और लोकसंस्कृति का संवर्धन भी होता रहे।