
उत्तराखंड Express ब्यूरो
*बड़कोट /उत्तरकाशी*
वाराणसी स्थित गौधुनी फाउंडेशन एवं अनमोल ग्राम स्वरोजगार संस्थान, उत्तरकाशी के संयुक्त तत्वावधान में जनपद उत्तरकाशी में गो-आधारित आजीविका, महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण विषय पर प्रशिक्षण एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को गो-आधारित प्राकृतिक उत्पादों के निर्माण का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ना तथा स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भर आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना था।
कार्यक्रम में महिलाओं, युवतियों एवं स्वयं सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी रही। कार्यशाला में गौधुनी फाउंडेशन की संस्थापिका श्रीमती रीता तिवारी ने प्रतिभागियों को देशी गाय के गोबर एवं गौमूत्र से तैयार होने वाले पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों के निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि गो-आधारित उत्पाद पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को हैंडवॉश, टॉयलेट क्लीनर, गो-नायल (फ्लोर क्लीनर), डिशवॉश, धूप स्टिक, समब्राणी कप, जाप माला, बैकफ्लो धूप शंकु, गोबर पॉट, दीये, वर्मी कम्पोस्ट, प्राकृतिक गुलाल सहित अनेक उपयोगी उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। इसके अतिरिक्त भगवान गणेश, माता लक्ष्मी, माता सरस्वती, भगवान बुद्ध, गौ माता एवं आदियोगी की गोबर से निर्मित पर्यावरण-अनुकूल मूर्तियां बनाने की तकनीक भी सिखाई गई।
कार्यशाला में जैविक खेती, प्राकृतिक जीवनशैली, प्लास्टिक मुक्त अभियान, गो-संवर्धन तथा स्थानीय संसाधनों पर आधारित स्वरोजगार के विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार कर स्थानीय एवं ऑनलाइन बाजारों में उनकी अच्छी मांग विकसित की जा सकती है।
अनमोल ग्राम स्वरोजगार संस्थान के संस्थापक राजेंद्र सेमवाल ने कहा कि गोबर एवं गोमूत्र से हजारों रुपये मूल्य के उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। यदि इनसे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तो लोग गौवंश को बेसहारा नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने बताया कि संस्थान ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से 15 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित करेगा, जिसमें स्वयं सहायता समूहों एवं इच्छुक महिलाओं को गो-आधारित उत्पाद निर्माण का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
संस्थान के पदाधिकारियों ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने, स्थानीय रोजगार बढ़ाने तथा पलायन रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। भविष्य में उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
कार्यक्रम के दौरान संस्थान की समन्वयक अंजलि नौटियाल ने सभी अतिथियों का उत्तराखंड की पारंपरिक ब्रह्मकमल टोपी पहनाकर स्वागत किया। नौगांव-बड़कोट गौशाला के भ्रमण के उपरांत देवलसारी में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ ग्राम के वरिष्ठ नागरिक रामकृष्ण नौटियाल ने किया।
इस अवसर पर प्रगति स्वयं सहायता समूह की सुनीता, ललित राणा, अंजलि, जयशीला राणा, अबली देवी, पमीत, मीना, सोनम, किरण, पूजा, हरिपाल, श्यामलाल, सरोज, विनोद सहित बड़ी संख्या में महिलाओं एवं स्थानीय ग्रामीणों ने भागीदारी की।