जयप्रकाश बहुगुणा
आराकोट /उत्तरकाशी
उत्तराखंड के हिमाचल प्रदेश से लगे उत्तरकाशी जनपद के बौंगाण क्षेत्र में एक ऐसा पुस्तक मेला आयोजित हुआ जैसा अब तक सुना नहीं गया है। इस “किताबिउँ रौ बिशु” (अपनी किस्म का एक अनूठा पुस्तक मेला) ने ग्रामीण लोगों के बीच किताबों के प्रति कौतूहल जगाने की दिशा में शानदार किस्म का प्रयास किया। स्थानीय लोक उत्सव “बिशु” के अवसर पर भुटाणु में आयोजित इस विशेष पुस्तक मेले में सैकड़ों पुस्तकों का प्रदर्शन किया गया तथा इच्छुक लोगों को पुस्तकें निःशुल्क उपलब्ध करवाई गई।
भुटाणू गांव के मंदिर परिसर में होने वाले “बिशु” उत्सव में पारंपरिक धनुष-बाण का खेल “ठोटै” और लोकगीत-नृत्य का मौइंजौणी, किरोलि, पाउलि, डेलूण, गमरी आदि गांवों से पहुंचे लोगों ने सामूहिक आनंद लिया। इसी दौरान यह पुस्तक मेला सभी के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा, जहां बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने अपनी रुचि के अनुसार पुस्तकें प्राप्त कीं।
इस अभिनव पहल के मूल विचारक, मौंइंजौणी गांव (बौंगाण) निवासी शुबा ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य लोगों में पढ़ने की आदत को प्रोत्साहित करना और वैचारिक परिपक्वता विकसित करना है। उन्होंने कहा कि “किताबें पढ़ना आत्म-विकास और सकारात्मक चिंतन का सशक्त माध्यम है। जिन परिवारों में विद्यालयी पुस्तकों के अतिरिक्त अन्य साहित्य उपलब्ध नहीं है या पुस्तकें खरीदना जिनकी प्राथमिकता में नहीं है, वहां निःशुल्क पुस्तकें पहुंचाना हमारा मुख्य लक्ष्य है।” उन्होंने यह भी बताया कि वह यह पहल बौंगाण में ही करना चाहते थे इसलिए इसका बौंगाणी नाम “किताबिउँ रौ बिशु” रखा गया। बौंगाणी भाषा में बिशु का एक अर्थ मेला या जमघट भी होता है। बैसाखी पर्व पर बसंत ऋतु के आगमन एवं नई फसल की खुशी व उल्लास में, ढोल- दमांऊ, रण सिंघा और पारंपरिक वेशभूषा में गीत- नृत्य के साथ “बिशु” मेला मनाया जाता है।
इस पुस्तक मेले की सारी की सारी पुस्तकें शुबा की निजी पुस्तकें थीं, लेकिन उनका कहना है कि ये तो एक छोटी सी शुरुआत है, वो इस आयोजन को बृहद रूप देने के लिए अन्य कई लोगों से सहयोग लेंगे ।
उन्होंने ये भी कहा कि इस पहल को अपेक्षा से कहीं अधिक उत्साह, सहयोग और स्नेह प्राप्त हुआ जिससे इसे बौंगाण के दूसरे गांव में आयोजित करने की इच्छा को और अधिक बल मिला है।
आयोजन के सहयोगी शिक्षक और कलाकर्मी सुरक्षा रावत ने जानकारी दी कि यदि गांववासियों का इसी प्रकार सहयोग मिलता रहा, तो इस अभियान को अन्य गांवों तक भी विस्तारित किया जाएगा। साथ ही, बच्चों की ग्रीष्मकालीन एवं शीतकालीन अवकाश के अतिरिक्त अन्य पर्व-त्योहारों पर भी इस ढंग के पुस्तक मेलों का आयोजन किया जाएगा जहां कोई भी बच्चा या बड़ा अपनी पसंद की पुस्तक मुफ़्त में ले जा सकता है। एक व्यक्ति को एक ही किताब दी जा रही थी, जबकि कुछ युवा एक से अधिक किताबें लेना चाहते थे। यह भी देखा गया कि कोई कोई युवा, वहीं बैठकर पढ़ रहे थे ताकि पुस्तकों का अधिक से अधिक लाभ उठाया जा सके।
इस सफल आयोजन में आर.पी. विशाल, प्रभु सिंह पंवार, फते सिंह पंवार, सम्यक रावत और दीपक पंवार का विशेष योगदान रहा। आयोजन के सूत्रधार शुबा ने शिक्षक दीवान सिंह चौहान, गौरव नौटियाल, बृजमोहन, रमेशी, रीना, रेखा पंवार तथा समस्त ग्रामवासियों का उनके सहयोग के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया।