*उत्तरकाशी : पुरोला विधानसभा के पूर्व व वर्तमान भाजपा विधायकों में जुबानी जंग तेज,एक दूसरे पर अनुठे अंदाज में हुए हमलावर*

 

जयप्रकाश बहुगुणा 

*पुरोला /उत्तरकाशी*

 

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की घोषणा तो अभी नहीं हुई है लेकिन उत्तरकाशी जनपद की पुरोला आरक्षित सीट पर भारतीय जनता पार्टी के दो नेताओं वर्तमान विधायक दुर्गेश्वर लाल व पूर्व विधायक मालचंद में जुबानी जंग तेज हो गई है!गत दिनों पुरोला क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान विधायक दुर्गेश्वर लाल द्वारा पूर्व विधायक मालचंद को “ध्याड़ी का मजदूर”कहे जाने पर मालचंद ने अपनी प्रतिक्रिया सोशल मिडिया के माध्यम से अपने अनुठे अंदाज में ब्यक्त की है!पुरोला की जनता के नाम मेरा संदेश के तहत पूर्व विधायक मालचंद ने अपने सोशल मिडिया अकाउंट के माध्यम से कहा है कि बीते कल विकास खंड पुरोला के धामपुर में आयोजित संगठन की बैठक में मेरी अनुपस्थिति में जिस प्रकार वर्तमान विधायक द्वारा वरिष्ठ नेताओं एवं कार्यकर्ताओं के समक्ष मेरे बारे में अपमानजनक टिप्पणियां की गईं, वह केवल मेरे उपर की गई टिप्पणी नहीं है। बल्कि यह उन किसानों, उन मजदूरों, उस मातृशक्ति और उस आम जनमानस का अपमान है, जो लोग कृषि कार्य करते हैं, खेती करते हैं और अपने घर की आजीविका चलाने के लिए मजदूरी भी करते हैं।

मुझे आश्चर्य इस बात का नहीं है कि मेरे खिलाफ बातें कही गईं, बल्कि इस बात का है कि आज किसानों के साथ खेत में उतरना, उनकी मेहनत को सम्मान देना और अपनी परंपराओं के साथ खड़ा होना भी कुछ लोगों को खटकने लगा है। यदि खेत में जाकर रोपाई करना अपराध है, यदि किसान के पसीने को सम्मान देना गलत है, तो मैं यह “अपराध” जीवनभर करता रहूंगा।

पुरोला विधानसभा का लाल धान आज पूरे देश में अपनी पहचान बना चुका है। हमारे किसानों की मेहनत और हमारी परंपराओं की खुशबू देश के सर्वोच्च स्तर तक पहुंची है। ऐसे किसानों को सम्मान देने के बजाय यदि उनका मजाक उड़ाया जाए, तो यह केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि पूरी पुरोला विधानसभा की आत्मा को ठेस पहुंचाने जैसा है।

कुछ दिन पहले मुझे “चपरासी” कहा गया, आज “ध्याड़ी वाला मजदूर” कहा जा रहा है। लेकिन मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि मुझे इन शब्दों से कोई पीड़ा नहीं है। मुझे गर्व है कि यदि जनता की सेवा करने, किसानों के साथ खेत में काम करने और मातृशक्ति के साथ खड़े रहने के कारण मुझे मजदूर कहा जाता है, तो यह मेरे लिए किसी सम्मान से कम नहीं है। मजदूर और किसान इस देश की रीढ़ हैं, उनका अपमान किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।उन्होंने कहा है कि मैं जनता के विश्वास में भरोसा रखता हूं। कि वह आने वाले समय में जवाब देंगे। मेरे लिए पद और प्रतिष्ठा से बड़ा सम्मान जनता का आशीर्वाद है।

मैं वर्तमान विधायक से केवल इतना कहना चाहता हूं कि राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन किसानों, मजदूरों, मातृशक्ति और हमारी सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान हर जनप्रतिनिधि का कर्तव्य है। पद आते जाते रहते है, लेकिन जनता का आत्मसम्मान और उसके संस्कार हमेशा अमर रहते हैं।
पूर्व विधायक मालचंद ने कहा है कि मैं किसानों के साथ था, हूं और हमेशा रहूंगा। यही मेरी असली औकात है क्योंकि मेरे लिए राजनीति नहीं, जनता सबसे ऊपर है!

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