उत्तरकाशी : रंवाईघाटी के सुप्रसिद्ध पौराणिक डांडा देवराणा जातर (मेले)की तैयारियां शुरू, वर्षभर बाद 65 गावों के आराध्य रुद्रेश्वर महादेव देंगें भक्तों को दर्शन व आशीर्वाद*

 

 

जयप्रकाश बहुगुणा 

*बड़कोट/उत्तरकाशी*

यमुना घाटी में आस्था, श्रद्धा और लोक परंपराओं के प्रतीक 65 गांवों के आराध्य देव श्री रुद्रेश्वर महादेव एक वर्ष बाद अपने तिंयाँ थान मंदिर के गर्भगृह से बाहर निकलकर भक्तों को दर्शन देंगे। इस पावन अवसर को लेकर क्षेत्रभर में उत्साह का माहौल है। आगामी 30 जून को भगवान रुद्रेश्वर महादेव मंदिर के गर्भगृह से बाहर निकलेंगे, जबकि एक जुलाई को महादेव की दिव्य डोली तिंयाँ गांव से पारंपरिक बाध्य यंत्रो और धार्मिक जयघोषों के बीच ऐतिहासिक डांडा देवराना मेले के लिए प्रस्थान करेगी।
डांडा देवराना में आयोजित होने वाले इस एक दिवसीय राजकीय मेले में भगवान रुद्रेश्वर महादेव श्रद्धालुओं को दर्शन देकर अपना आशीर्वाद प्रदान करेंगे। क्षेत्र के विभिन्न गांवों से हजारों श्रद्धालु मेले में पहुंचकर अपने आराध्य देव के दर्शन करते हैं तथा सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं। मेले के दौरान लोक संस्कृति, धार्मिक आस्था और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
परंपरा के अनुसार शाम लगभग चार बजे भगवान रुद्रेश्वर महादेव भक्तों को दर्शन देकर आशीर्वाद देते हैं। इस अवसर पर दूर-दराज के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मेले में पहुंचते हैं और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं। डांडा देवराना मेला क्षेत्र की प्राचीन धार्मिक परंपराओं और लोक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।
तिंयाँ गांव निवासी एवं श्री रुद्रेश्वर महादेव के पुजारी मोहित थपलियाल ने बताया कि 65 गांवों के आराध्य देव के इस पवित्र मेले में हर वर्ष दूर-दूर से श्रद्धालु आशीर्वाद प्राप्त करने पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि पौराणिक काल से चली आ रही यह परंपरा आज भी लोगों की आस्था का प्रमुख आधार बनी हुई है। धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए डांडा देवराना मेले को राजकीय मेले का दर्जा भी प्राप्त है।

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