जयप्रकाश बहुगुणा
*नौगांव/उत्तरकाशी*
उत्तराखंड राज्य को बने हुए 25 वर्ष पूरे हो गये हैं, राज्य सरकार राज्य गठन की रजत जयंती व समग्र विकास के बड़े बड़े आयोजनों व कर्यक्रमों में ब्यस्त है लेकिन धरातल पर कहानी कुछ और ही बयां कर रही है!आज भी राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में दर्जनों गांव ऐसे हैं जो विकास व सुविधाओं के लिहाज से मुख्य धारा में शामिल नहीं हुए हैं! इन गावों में मुलभुत सुविधाएं आज भी लोगों के लिए दूर की कौड़ी बनी हुई है! सड़क व स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं से ए गांव आज भी पूरी तरह वंचित है!मामूली बीमार हो या कोई गर्भवती महिला की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी, लोगों को आज भी कई किलोमीटर तक अपने कंधों व डोली -पालकी के सहारे बीमार को ढोकर अस्पतालों तक पहुंचाना पड़ता है!ऐसा ही एक मामला रविवार को देखने को मिला!जहाँ सड़क सुविधा से लाचार ग्रामीणों ने एक बीमार महिला को पीठ पर कई किलोमीटर ढोकर सड़क मार्ग तक पहुंचाया!
उत्तरकाशी जिले के नौगांव विकासखंड स्थित खांसी के दोणी गांव में सड़क सुविधा के अभाव ने एक बार फिर विकास के दावों पर सवाल खड़े कर दिए। रविवार को गांव की निवासी सुरतमा देवी की अचानक तबीयत बिगड़ गई। सड़क न होने के कारण ग्रामीणों ने उन्हें पीठ पर लादकर करीब 6 किलोमीटर पैदल मोटर मार्ग तक पहुंचाया। इसके बाद उन्हें उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पुरोला ले जाया गया।
ग्रामीण रविंद्र बड़थ्वाल, शीशपाल, कृष्ण, जगवीर, यशवंत, कपिल और प्रवीण असवाल ने बताया कि दोणी गांव आज भी सड़क सुविधा से वंचित है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से मोटर मार्ग निर्माण की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।ग्रामीणों ने अब जिलाधिकारी से सड़क निर्माण के लिए गुहार लगाई है, ताकी ग्रामीणों को मुलभूत सुविधाएं उपलब्ध हो सके!
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में गर्भवती महिलाओं को भी प्रसव पीड़ा के दौरान पालकी में बैठाकर कई किलोमीटर पैदल लाना पड़ता है। उनका आरोप है कि अधिकारी केवल फाइल शासन में भेजे जाने की बात कहते हैं, जबकि गांव के लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।
ग्रामीणों ने सरकार से दोणी गांव तक जल्द सड़क निर्माण कर ग्रामीणों को इस परेशानी से राहत दिलाने की मांग की है।