चारों ओर से घिरा स्यानाचट्टी: यमुना का उफान, खड्डों का खतरा और पहाड़ की दहाड़ से दहशत में लोग

चारों ओर से घिरा स्यानाचट्टी: यमुना का उफान, खड्डों का खतरा और पहाड़ की दहाड़ से दहशत में लोग
– बीते साल से लगातार प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रहा स्यानाचट्टी कस्बा
– स्थानीय लोग कर रहे स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की मांग

उत्तराखंड एक्सप्रेस ब्यूरो

बड़कोट (उत्तरकाशी)

कभी चारधाम यात्रा का सुरक्षित पड़ाव माना जाने वाला स्यानाचट्टी आज चारों दिशाओं से प्राकृतिक आपदाओं के शिकंजे में जकड़ा हुआ है। यमुनोत्री धाम यात्रा का प्रमुख पड़ाव स्यानाचट्टी पिछले साल से लगातार प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रहा है। चारों ओर से संकटों से घिरे इस कस्बे में एक ओर यमुना नदी का बढ़ता जलस्तर लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है, तो दूसरी ओर पहाड़ियों से हो रहे लगातार भूस्खलन ने लोगों की नींद उड़ा दी है। इसके अलावा दाएं और बाएं ओर से बहने वाले कुपड़ा खड्ड (घट गाड़) और डडोटी खड्ड हर बरसात में तबाही का नया खतरा बनकर सामने खड़े हैं। ऐसे हालात में स्थानीय लोगों की निगाहें सरकार और प्रशासन पर टिकी हैं कि आखिर स्यानाचट्टी की स्थायी सुरक्षा का समाधान कब होगा।

पिछले वर्ष कुपड़ा खड्ड (घट गाड़) से आए भारी मलबे और विशाल बोल्डरों ने यमुना नदी का प्रवाह रोक दिया था, जिससे स्यानाचट्टी में अस्थायी झील बन गई थी। इस घटना में कई होटल, मकान और व्यापारिक प्रतिष्ठान प्रभावित हुए तथा लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

वहीं दूसरी ओर डडोटी खड्ड से लगातार बहकर आने वाला मलबा और बोल्डर यमुना नदी में जमा होकर स्यानाचट्टी के समीप सिल्ट का ढेर खड़ा कर रहे हैं। इससे यमुना नदी का तल लगातार ऊंचा होता जा रहा है, जिसके कारण नदी का जलस्तर बढ़ने पर कई होटलों की निचली मंजिलें सिल्ट और पानी की चपेट में आ रही हैं और हर बारिश के साथ नया खतरा मंडराने लगता है।
इतना ही नहीं, इस वर्ष यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण के दौरान की जा रही अनियंत्रित और अवैज्ञानिक पहाड़ी कटिंग ने भी स्थिति को और गंभीर बना दिया है। लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण यहां न केवल स्थानीय लोगों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है, बल्कि चारधाम यात्रा पर आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को भी जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है। पहाड़ से कई बार विशाल बोल्डर गिरकर कस्बे में आ रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक कुपड़ा खड्ड (घट गाड़), डडोटी खड्ड, यमुना नदी और भूस्खलन प्रभावित पहाड़ियों के लिए वैज्ञानिक एवं स्थायी सुरक्षा उपाय नहीं किए जाते, तब तक स्यानाचट्टी हर मानसून में इसी तरह आपदा के साये में जीने को मजबूर रहेगा। लोगों ने सरकार से मांग की है कि क्षेत्र की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए दीर्घकालिक योजना पर तत्काल कार्य शुरू किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की त्रासदियों से स्थायी राहत मिल सके।

स्यानाचट्टी में वर्तमान में यमुना के जलस्तर को बढ़ने से रोकने के लिए लगातार चेनेलाईजेशन का कार्य किया जा रहा तथा कुपड़ा खड्ड के चेनेलाईजेशन का भी कार्य किया जा रहा है। सिंचाई विभाग की मशीनें नदी के बहाव को व्यवस्थित करने, मलबा हटाने और जलधारा को सुचारु रखने में जुटी हैं, ताकि जलभराव और कटाव के खतरे को कम किया जा सके।

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