उत्तराखंड एक्सप्रेस ब्यूरो
बड़कोट (उत्तरकाशी)
एक ओर बरसात में उफनता कुपड़ा खड्ड, तो दूसरी ओर पहाड़ी से गिरते पत्थरों और मलबे का खतरा। इन दोहरी चुनौतियों के बीच नौगांव ब्लॉक के तीन गांवों के करीब 25 स्कूली बच्चे रोज अपनी जान हथेली पर रखकर शिक्षा हासिल करने निकलते हैं। पिछले साल आपदा में क्षतिग्रस्त पुल का अब तक पुनर्निर्माण नहीं हो पाया है, जबकि अधूरा पड़ा बेली ब्रिज भी बच्चों की राह आसान नहीं बना सका है।
नौगांव ब्लॉक की गीठ पट्टी क्षेत्र के कुपड़ा, कुनसाला और त्रिखली गांव के स्कूली बच्चों के लिए बरसात का मौसम किसी परीक्षा से कम नहीं है। कुपड़ा गांव के बच्चों को हाईस्कूल तथा कुनसाला और त्रिखली के बच्चों को जूनियर एवं हाईस्कूल की पढ़ाई के लिए रोजाना उफनते कुपड़ा खड्ड (घट गाड़) को पार कर स्यानाचट्टी जाना पड़ता है। यहां तेज बहाव वाले खड्ड के साथ ऊपर से गिरते चट्टानी मलबे और पत्थरों का खतरा भी हर समय बना रहता है।
तीनों गांवों के करीब 25 छात्र-छात्राएं प्राथमिक शिक्षा के बाद आगे की पढ़ाई के लिए स्यानाचट्टी स्थित विद्यालय में पढ़ने जाते हैं।
पिछले वर्ष आई आपदा में कुपड़ा खड्ड पर बना मोटर पुल क्षतिग्रस्त हो गया था, लेकिन एक वर्ष बीतने के बाद भी उसका पुनर्निर्माण नहीं हो सका है। वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में यहां बेली ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन उसकी एक ओर की एप्रोच लंबे समय से अधूरी पड़ी है। एप्रोच तैयार नही होने के कारण पुल का लाभ ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में बच्चे मजबूरी में जान जोखिम में डालकर उफनते खड्ड को पार कर स्कूल पहुंच रहे हैं।
शैलेंद्र सिंह राणा, दिनेश राणा, मनमोह सिंह, महावीर सिंह, राकेश सिंह आदि ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दौरान खड्ड का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है और पहाड़ी से पत्थर गिरने का खतरा भी बना रहता है। उन्होंने प्रशासन से बेली ब्रिज की अधूरी एप्रोच को तत्काल पूरा कर पुल को चालू करने और स्थायी मोटर पुल का निर्माण शीघ्र कराने की मांग की है, ताकि बच्चों और ग्रामीणों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।