*उपलब्धि पर सम्मान : शंघाई से रजत पदक लेकर लौटी सानिया जोशी , ऋषिराम शिक्षण संस्थान में हुआ जोरदार स्वागत*

 

जयप्रकाश बहुगुणा 

*उत्तरकाशी*

शंघाई की धरती पर भारत का मान बढ़ाने के बाद जब चिन्यालीसौड़ की बेटी सानिया जोशी अपने पुराने विद्यालय ऋषिराम शिक्षण संस्थान पहुंचीं, तो माहौल उपलब्धि के जश्न में बदल गया। कभी इसी विद्यालय की कक्षाओं में बैठकर सपने देखने वाली सानिया अब विश्व कौशल प्रतियोगिता में भारत के लिए रजत पदक जीतकर लौटी हैं।

सानिया ने चीन के शंघाई में आयोजित वर्ल्ड स्किल्स कम्पटीशन के रिटेल सेल्स मैनेजमेंट क्षेत्र में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए सिल्वर मेडल हासिल किया। उनकी इस उपलब्धि पर ऋषिराम शिक्षण संस्थान में उनका भव्य अभिनंदन किया गया।

वर्ष 2022 में इसी विद्यालय से 12वीं पास करने वाली सानिया ने इसके बाद NIFT पंचकूला से चार वर्षीय फैशन डिजाइनिंग पाठ्यक्रम पूरा किया। मेहनत, आत्मविश्वास और लगातार बेहतर करने की जिद ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया।
विद्यालय पहुंचने पर प्रबंधक डॉ. अरविंद जगूड़ी और प्राचार्य डॉ. एस.के. मिश्रा ने सानिया, उनके पिता और भाई का अंगवस्त्र एवं पुष्पमालाओं से स्वागत किया। उप-प्रधानाचार्य बद्रीश बिष्ट ने सानिया के सम्मान में तैयार गौरव-अभिनंदन पत्र का वाचन किया और विद्यालय परिवार की ओर से सम्मान-पत्र भेंट किया।
इस दौरान सानिया ने विद्यालय के विद्यार्थियों से खुलकर बातचीत की। विद्यार्थियों ने उनसे सफलता की राह, लक्ष्य तय करने और माता-पिता की भूमिका को लेकर सवाल किए।

सानिया ने कहा कि सपना तभी मंजिल बनता है, जब लक्ष्य स्पष्ट हो और उसके लिए लगातार ईमानदारी से मेहनत की जाए। उन्होंने विद्यार्थियों से माता-पिता और गुरुजनों के साथ संवाद बनाए रखने तथा अपने फैसलों को मेहनत और परिणामों के जरिए सही साबित करने की बात कही।

प्रबंधक डॉ. अरविंद जगूड़ी ने कहा कि सानिया ने विश्व मंच पर रजत पदक हासिल कर केवल अपने परिवार और विद्यालय का ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तरकाशी और उत्तराखण्ड का नाम रोशन किया है। उनकी उपलब्धि विद्यालय के विद्यार्थियों के लिए बड़ी प्रेरणा है।

प्राचार्य डॉ. एस.के. मिश्रा ने कहा कि सानिया की सफलता साबित करती है कि शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन और आत्मविश्वास मिले तो विद्यार्थी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना सकते हैं।विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं और कर्मचारियों ने भी सानिया को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

चिन्यालीसौड़ की बेटी की यह उपलब्धि सिर्फ एक रजत पदक की कहानी नहीं है, बल्कि उस सफर की कहानी है जो एक स्थानीय विद्यालय की कक्षा से शुरू होकर शंघाई के विश्व मंच तक पहुंचा।

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