
जयप्रकाश बहुगुणा
*बड़कोट /उत्तरकाशी*
राजकीय महाविद्यालय बड़कोट में गृह विज्ञान विभाग, द्वारा सहायक प्राध्यापक डॉ. पूजा के निर्देशन में बुधवार को उत्तराखंड की पारंपरिक खाद्य-संस्कृति एवं स्थानीय व्यंजनों के संरक्षण एवं संवर्धन तथा विद्यार्थियों को अपनी समृद्ध पाक-परंपराओं से परिचित कराने के उद्देश्य से गढ़भोज दिवस के अवसर पर पारंपरिक व्यंजन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के आयोजन में प्रयोगशाला सहायक श्रीमती भागेश्वरी डोभाल का सहयोग रहा। प्रतियोगिता में महाविद्यालय की छात्राओं ने उत्तराखंड, विशेष रूप से रवांई घाटी के पारंपरिक व्यंजनों को प्रस्तुत किया। छात्राओं द्वारा विभिन्न स्थानीय एवं पारंपरिक व्यंजनों को उनके पारंपरिक स्वरूप, पोषणीय महत्त्व एवं आकर्षक प्रस्तुतीकरण के साथ प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विनोद कुमार एवं वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. अंजू भट्ट उपस्थित रहे । प्रतियोगिता में डॉ. लीलावती नितवाल एवं डॉ. श्रीकांत चौधरी ने निर्णायक के रूप में प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत व्यंजनों का पारंपरिकता, पोषणीयता, स्थानीयता एवं प्रस्तुतीकरण आदि विभिन्न मानकों के आधार पर मूल्यांकन किया। प्रतियोगिता में प्रियांशी एवं साक्षी बी.ए. प्रथम सेमेस्टर ने प्रथम स्थान, अनामिका एवं जिया बी.ए. प्रथम सेमेस्टर, ने द्वितीय स्थान तथा कुसुम शाह बी.ए. तृतीय सेमेस्टर, ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
इस अवसर पर डॉ. प्रश्नना मिश्रा, डॉ. आशीष नौटियाल, श्रीमती संगीता डोभाल सहित महाविद्यालय के अन्य प्राध्यापक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे तथा उन्होंने छात्राओं द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक व्यंजनों का अवलोकन कर उनका उत्साहवर्धन किया।
वहीं रामचंद्र उनियाल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, उत्तरकाशी में गढ़ भोज कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य उत्तराखंड के पारंपरिक एवं पौष्टिक स्थानीय व्यंजनों के संरक्षण, संवर्धन तथा नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध खान-पान संस्कृति से परिचित कराना रहा।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. मनीष सेमवाल रहे।गढ़ भोज में उत्तराखंड की पारंपरिक खाद्य संस्कृति की विविधता विशेष आकर्षण का केंद्र रही। कार्यक्रम में कोदे की रोटी, झंगोरे की खीर, दाल की पकौड़ी, रायता, लाल भात, आलू की थेचवाणी तथा भुजेले का साग सहित अनेक स्थानीय व्यंजन प्रस्तुत किए गए। इन व्यंजनों के माध्यम से उत्तराखंड के पारंपरिक अनाज, स्थानीय उत्पादों और सदियों पुरानी पाक परंपराओं की समृद्ध विरासत को प्रदर्शित किया गया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि गढ़ भोज हमारी लोक संस्कृति, स्थानीय कृषि और पारंपरिक जीवन-पद्धति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मंडुवा, झंगोरा, भट्ट, गहत आदि स्थानीय अनाज एवं दालें न केवल पौष्टिक हैं, बल्कि पहाड़ की कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी गहराई से जुड़ी हुई हैं। आधुनिक खान-पान के बढ़ते प्रभाव के बीच इन पारंपरिक खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है!प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से गढ़ भोज का आनंद लिया तथा उत्तराखंड की पारंपरिक खाद्य संस्कृति को संरक्षित एवं आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
गाड़ भोज के इस कार्यक्रम में आयोजित प्रतियोगिता में प्रथम स्थान चित्रकला विभाग, द्वितीय स्थान गृह विज्ञान विभाग तथा तृतीय स्थान वनस्पति विभाग ने प्राप्त कियासंयोजक डॉ. मनीष सेमवाल ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए महाविद्यालय के सभी विभागों, प्राध्यापकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया।
