भागवत कथा समाज में प्रेम और सद्भाव का संदेश देती है : दुर्गेश आचार्य

उत्तराखंड एक्सप्रेस ब्यूरो
बड़कोट

यमुनाघाटी के नंदगांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास संत दुर्गेश आचार्य ने श्रद्धालुओं को कथा श्रवण कराते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा वर्तमान संक्रमण काल में समाज को प्रेम, सद्भाव और समरसता का संदेश देती है।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अधर्म और अन्याय के प्रतीक कौरव रूपी बुराइयों का अंत कर धर्म, न्याय और सत्य की स्थापना पांडवों को विजय दिलाकर की। कथा के दौरान उन्होंने कुंती प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने कुंती से कुछ मांगने को कहा, तब कुंती ने जीवनभर दुख देने का वर मांगा। इस पर उन्होंने कहा कि मानव स्वभाव ऐसा है कि सुख में वह प्रभु को भूल जाता है, जबकि दुख में ही उसे ईश्वर का स्मरण होता है।

दुर्गेश आचार्य ने कहा कि कुंती ने प्रभु से दुख इसलिए मांगा ताकि वह निरंतर भगवान का स्मरण और दर्शन करती रहें। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि कलियुग में श्रीमद्भागवत ही भगवान का साक्षात स्वरूप है। जो श्रद्धा भाव से भागवत कथा का श्रवण और दर्शन करता है, भगवान स्वयं उसके हृदय में निवास कर उसे परम मोक्ष प्रदान करते हैं।

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