
उत्तराखंड Express ब्यूरो
कर्णप्रयाग /चमोली
डॉ. शिवानन्द नौटियाल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कर्णप्रयाग के इतिहास विभाग द्वारा मंगलवार को एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभागीय परिषद का विधिवत गठन, भाषण प्रतियोगिता और पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ महाविद्यालय के प्राचार्य द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।विभागीय परिषद के गठन में अध्यक्ष -एम.ए. तृतीय सेमेस्टर की दिव्या,सचिव एम.ए. प्रथम सेमेस्टर की बबीता जुयाल, कोषाध्यक्ष – बी.ए. पंचम सेमेस्टर की अमीषा, उपाध्यक्ष बी.ए. तृतीय सेमेस्टर की छात्रा रिया, सह-सचिव बी.ए. प्रथम सेमेस्टर छात्र मनीष के साथ-साथ कक्षा प्रतिनिधियों के रूप में एम.ए. तृतीय सेमेस्टर की प्रिया, एम.ए. प्रथम सेमेस्टर की भावना, बी.ए. पंचम सेमेस्टर की हिमानी, बी.ए. तृतीय सेमेस्टर के राहुल मनराल और बी.ए. प्रथम सेमेस्टर की कनिष्का का चयन किया गया। भाषण प्रतियोगिता में सुप्रिया व पेंटिंग में दिव्या राणा प्रथम रहीं।भाषण प्रतियोगिता का विषय था “भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उत्तराखण्ड की विभूतियों का योगदान” था। जिसमें
प्रथम स्थान -बी.ए. प्रथम सेमेस्टर की सुप्रिया,द्वितीय स्थान – बी.ए. प्रथम सेमेस्टर की कनिष्का, तृतीय स्थान, एम.ए. तृतीय सेमेस्टर की दिव्या को मिला। पेंटिंग प्रतियोगिता का विषय था “इतिहास से सम्बन्धित घटनाओं अथवा व्यक्तित्वों की चित्रकला”। जिसमें प्रथम स्थान – एम.ए. तृतीय सेमेस्टर की दिव्या राणा,
द्वितीय स्थान – बी.ए. प्रथम सेमेस्टर के सागर रावत,
तृतीय स्थान बी.ए. पंचम सेमेस्टर की अमीषा को मिला।
प्रतियोगिताओं में निर्णायक की भूमिका डॉ. कविता पाठक, डॉ. मदन लाल शर्मा एवं डॉ. कीर्तिराम डंगवाल ने निभाई।
प्राचार्य प्रो.राम अवतार सिंह ने अपने सम्बोधन में छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि इतिहास केवल भूतकाल की घटनाओं का लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि यह हमारे भविष्य का मार्गदर्शक है। उत्तराखण्ड की धरती वीरों और विभूतियों की धरती रही है, जिनके बलिदान को जानना प्रत्येक युवा का कर्तव्य है। इस प्रकार की प्रतियोगिताएँ छात्रों में शोध की प्रवृत्ति, तार्किक क्षमता और अपनी जड़ों से जुड़ने का भाव पैदा करती हैं।
विभाग प्रभारी डॉ. कामना लोहनी ने कहा कि विभागीय परिषद का उद्देश्य छात्रों में नेतृत्व क्षमता और संगठनात्मक कौशल विकसित करना है। इतिहास विषय को केवल किताबों तक सीमित न रखकर, उसे भाषण और चित्रकला के माध्यम से जीवंत करने का प्रयास किया गया है। आज छात्रों ने जिस उत्साह से उत्तराखण्ड के स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद किया है, वह सराहनीय है। हमारा प्रयास रहेगा कि भविष्य में भी हम ऐसे आयोजन कर छात्रों को अपनी संस्कृति और इतिहास से जोड़े रखें। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती पूनम द्वारा किया गया तथा अन्त में श्रीमती स्वाति सुन्दरियाल ने सभी अतिथियों, निर्णायक मण्डल एवं छात्र-छात्राओं का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम के समापन पर प्राचार्य द्वारा सभी विजेताओं को पुरस्कृत कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर इतिहास विषय के समस्त 204 छात्र-छात्राएं उत्साहपूर्वक उपस्थित रहे।
