*जीव और ब्रह्म के एकाकार से शाश्वत आनंद की प्राप्ति होती है : डाॅ. दुर्गेश आचार्य*

 

उत्तराखंड Express ब्यूरो 

* देहरादून

पुरुषोत्तम मास की सोमावती अमावस्या के अवसर पर श्रीमद भागवत कथा के तीसरे दिन बद्रीपुर में राष्ट्रीय संत और प्रख्यात कथा वाचक डाॅ. दुर्गेश आचार्य ने व्यास पीठ से कहा कि जब जीव और ब्रह्म एक हो जाते हैं तो जीवन में शाश्वत आनंद की स्थिति बन जाती है। श्रीमद भागवत मात्र एक पुस्तक ही नहीं अपितु भवसागर है। यह हमें जीवन जीने का ढंग भी सिखाती है। समाज में जो लोग दूसरों का शोषण कर रहे हैं वे सभी धृतराष्ट्र के समान हैं। उत्तराखंड देवभूमि है और यहां के निवासी सौभाग्यशाली हैं जिन्हें इस पावन धरा पर जन्म मिला है। भक्ति मार्ग ही सदमार्ग है, इस पर चलने वालों की दृष्टि में सब समान हैं। यह ऊँच-नीच के भेदभाव को समाप्त करने का संदेश देता है। समाज में नारी दुर्गा और शक्ति का रूप है। कहा गया है कि जहां नारियों की पूजा होती है, वहां देवताओं का वास होता है। बेटियां समाज की अमूल्य निधि हैं। बेटियां ही तीन कुलों का उद्धार करने वाली होती हैं। वर्तमान परिदृश्य में अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारतवर्ष एक विश्वगुरु की भूमिका में स्थापित हो रहा है। कथा के मंडपाचार्य रमेश चंद्र पैन्यूली ने अवगत कराया कि इस भागवत कथा महापुराण का आयोजन श्रीमती शकुंतला नौटियाल व श्रीमती ऊषा नौटियाल द्वारा करवाया जा रहा है। भागवत कथा श्रवण के लिए उत्तराखंड के विभिन्न शहरों से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।

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