सरनौल में धूमधाम से मनाया गया मां रेणुका का पौराणिक मेला, 22 गते ज्येष्ठ को प्रतिवर्ष आयोजित होता है ऐतिहासिक एवं धार्मिक मेला

उत्तराखंड एक्सप्रेस ब्यूरो
बड़कोट (उत्तरकाशी)

नौगांव विकासखंड के दूरस्थ सरनौल गांव में मां रेणुका का पौराणिक एवं धार्मिक ज्येष्ठ मेला शुक्रवार को श्रद्धा, उत्साह और पारंपरिक लोक संस्कृति के रंगों के साथ धूमधाम से मनाया गया। मेले में क्षेत्र के ग्रामीणों के साथ-साथ दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने मां रेणुका के दर्शन कर सुख-समृद्धि एवं मंगलकामना का आशीर्वाद प्राप्त किया।

सरनौल गांव में स्थित मां रेणुका का प्राचीन एवं आस्था का केंद्र माने जाने वाले मंदिर में मेले का शुभारंभ विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुआ। श्रद्धालुओं ने अपनी-अपनी श्रद्धा के अनुसार देवी को भेंट अर्पित कर परिवार और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। पूजा-अर्चना के उपरांत परंपरा के अनुसार मां रेणुका की पालकी गांव के प्रत्येक घर तक पहुंची और लोगों को आशीर्वाद प्रदान किया।

इसके बाद मंदिर परिसर में ‘कपुआ’ कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें गीतों के माध्यम से देवी की उत्पत्ति एवं महिमा का वर्णन किया गया। कपुआ के दौरान देवी अवतरित हुईं। देवी के अवतरण के पश्चात पश्वा ने नंगे पैर तेजधार वाले फरसों (डांगरे) पर चलकर क्षेत्रवासियों को शांति, सुख, समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद दिया। इस अद्भुत धार्मिक परंपरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में मौजूद रहे।

मेले में लोक संस्कृति की भी अनूठी छटा देखने को मिली। ग्रामीणों एवं मेलार्थियों ने पारंपरिक तांदी नृत्य, रासो नृत्य और डोली नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। ढोल-दमाऊं की थाप पर देर तक चले इन सांस्कृतिक आयोजनों में युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। दूर-दूर से पहुंचे लोगों ने पारंपरिक लोकनृत्यों का भरपूर आनंद लिया और तांदी नृत्य में शामिल होकर उत्सव को यादगार बना दिया।

मां रेणुका का यह पौराणिक मेला क्षेत्र की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं का जीवंत प्रतीक माना जाता है, जो हर वर्ष ज्येष्ठ मास की 22 गते को श्रद्धा और उत्साह के साथ आयोजित किया जाता है।

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