*काँवड़ यात्रा 2026 : 4.30 करोड़ शिवभक्तों की हुई सकुशल घर वापसी,  संत समाज ने किया प्रशासन का अभिनंदन, डीएम-एसएसपी को पहनाई सम्मान की पगड़ी*

 

उत्तराखंड Express ब्यूरो 

हरिद्वार

धर्म की राजधानी तीर्थनगरी हरिद्वार से शुरू हुई आस्था की विराट कांवड़ यात्रा जब सकुशल अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंची और करीब 4.30 करोड़ शिवभक्तों को सुरक्षित उनके घरों तक रवाना कर दिया गया, तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर सहित पूरे प्रशासनिक तंत्र की पीठ थपथपाई और इस ऐतिहासिक सफलता के लिए बधाई दी।

यह केवल एक मेला नहीं था, बल्कि देवभूमि उत्तराखंड की धरती पर आस्था का ऐसा विराट महासंगम था, जिसमें करोड़ों शिवभक्तों ने भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए कठिन से कठिन यात्राएं पूरी कीं। गुरु पूर्णिमा से प्रारंभ हुई कांवड़ यात्रा में गोमुख सहित विभिन्न पवित्र स्थलों से गंगाजल लेकर श्रद्धालु देश के कोने-कोने की ओर रवाना हुए।

कोई हजारों किलोमीटर पैदल चला, किसी ने दंडवत यात्रा की, कोई खड़ी कांवड़ लेकर निकला तो किसी ने झूला कांवड़ के माध्यम से अपनी श्रद्धा अर्पित की। अंतिम चरण में डाक कांवड़ और बाइक कांवड़ ने यात्रा को और विराट स्वरूप प्रदान किया। करोड़ों श्रद्धालुओं की इस विशाल आस्था यात्रा को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाना प्रशासन के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था।

रात-दिन एक कर जुटा रहा प्रशासन

इस विराट आयोजन की सफलता के पीछे हरिद्वार जिला प्रशासन और पुलिस की महीनों की तैयारी, रणनीति और मैदान में दिन-रात की मेहनत रही। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने स्वयं व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी करते हुए अधिकारियों और पुलिस बल को दिशा-निर्देश दिए।

भीड़ प्रबंधन, यातायात व्यवस्था, सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, पार्किंग, वैकल्पिक मार्ग, घाटों की व्यवस्था और कांवड़ पटरी से लेकर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों तक श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही—हर मोर्चे पर प्रशासन और पुलिस की अग्निपरीक्षा हुई।

प्रशासन के साथ संतों का आशीर्वाद भी बना शक्ति

कांवड़ मेले की सफलता में प्रशासन और पुलिस के साथ संत समाज की प्रार्थनाओं, विशेष पूजाओं और धार्मिक अनुष्ठानों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी सहित विभिन्न स्थानों पर कांवड़ मेले के सकुशल संपन्न होने के लिए विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान किए गए।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी के सचिव श्री महंत डॉ. रविंद्रपुरी महाराज तथा मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट से जुड़े संतों ने मां मनसा देवी और भगवान भोलेनाथ से कांवड़ यात्रा के निर्विघ्न एवं शांतिपूर्ण संपन्न होने की प्रार्थना की।

एक ओर जहां पुलिस और प्रशासन ने व्यवस्था की कमान संभाली, वहीं संतों ने आध्यात्मिक शक्ति के लिए अनुष्ठान और प्रार्थना की। यही समन्वय इस विराट आयोजन की सफलता का आधार बना।

4.30 करोड़ श्रद्धालु—सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण

करोड़ों लोगों की भीड़, हजारों किलोमीटर का आवागमन, लगातार बढ़ता यातायात और सीमित समय में इतने बड़े जनसमूह को सुरक्षित निकालना आसान नहीं था। लेकिन इस बार 4.30 करोड़ से अधिक शिवभक्तों की सकुशल वापसी ने हरिद्वार प्रशासन और पुलिस की कार्यक्षमता की मिसाल पेश कर दी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस सफलता को देखते हुए जिलाधिकारी, एसएसपी सहित तमाम अधिकारियों और कर्मचारियों की सराहना की और उन सभी को बधाई दी, जिन्होंने रात-दिन एक कर कांवड़ मेले को सकुशल संपन्न कराने में अपना योगदान दिया।

आस्था के महासागर को सुरक्षित पार कराना ही असली परीक्षा थी

कांवड़ मेला समाप्त हो गया, लेकिन इसके पीछे छिपी मेहनत की कहानी लंबे समय तक याद की जाएगी। करोड़ों कदमों की आस्था, पुलिस की चौकसी, प्रशासन की रणनीति, संतों की साधना और मां गंगा-भोलेनाथ की कृपा—इन सबके संगम ने इस महाआयोजन को सफलता के शिखर तक पहुंचाया।

संतों ने भी प्रशासन की सफलता को सराहा, डीएम-एसएसपी का किया सम्मान

कांवड़ मेला सकुशल संपन्न होने और करोड़ों शिवभक्तों की सुरक्षित घर वापसी पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री महंत डॉ. रविंद्रपुरी महाराज ने जिलाधिकारी मयूर दीक्षित एवं एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर का विशेष सम्मान किया। महाराज ने दोनों अधिकारियों को माला, पगड़ी एवं माता की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया तथा आशीर्वाद प्रदान किया। उन्होंने कहा कि संत समाज की प्रार्थनाओं, प्रशासन की कड़ी मेहनत और पुलिस की मुस्तैदी के समन्वय से ही इतना विशाल कांवड़ मेला शांतिपूर्ण एवं सकुशल संपन्न हो सका।

यह केवल 4.30 करोड़ शिवभक्तों की घर वापसी नहीं, बल्कि देवभूमि उत्तराखंड की प्रशासनिक क्षमता, पुलिस की मुस्तैदी और सनातन आस्था की शक्ति का विराट प्रमाण है।

हर-हर महादेव के जयघोष के बीच कांवड़िए अपने घर लौट गए और हरिद्वार ने एक बार फिर साबित कर दिया—जहां आस्था करोड़ों की हो, वहां व्यवस्था भी तपस्या बन जाती है।

 

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