*उत्तरकाशी : मनुष्य को अपने जीवन का नियंत्रण ईश्वर के हाथों में सौंप देना चाहिए : आयुषकृष्ण नयन महाराज*

 

 

जयप्रकाश बहुगुणा 

*बड़कोट /उत्तरकाशी*

तहसील बड़कोट के नगाण गांव में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के दौरान एक अत्यंत भावपूर्ण प्रसंग ने श्रोताओं को गहरे भक्ति भाव में डुबो दिया। कथा व्यास आयुष कृष्ण नयन महराज जी ने “जेहि बिधि नाथ होइ हित मोरा, करहु सो बेगि दास मैं तोरा”
अपने प्रवचन में उन्होंने बताया कि यह चौपाई हमें सिखाती है कि मनुष्य को अपने जीवन का नियंत्रण ईश्वर के हाथों में सौंप देना चाहिए। जब व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा से कहता है कि “हे प्रभु, मेरे हित में जो भी उचित हो, वही शीघ्र कीजिए, मैं आपका दास हूँ,” तब उसके जीवन में चिंता, भय और असमंजस समाप्त होने लगते हैं।
भाजपा नेता मनवीर सिंह चौहान के स्वर्गीय धर्मपत्नी की वार्षिक श्रद्धां एवं पितरों के उद्धार हेतु आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पाँचवें दिन कथा वक्ता आयुष कृष्ण नयन महाराज जी ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का अत्यंत मार्मिक और मनमोहक वर्णन प्रस्तुत किया, जिसे सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भक्ति भाव में डूब गए। कथा का मुख्य आकर्षण ग्वाल-बालों के साथ भगवान की बाल सुलभ चंचलता और उनकी अलौकिक लीलाएं रहीं।
कथा व्यास जी ने पूतना वध प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए बताया कि किस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने दैत्यनी पूतना का उद्धार कर उसे मोक्ष प्रदान किया। इस प्रसंग ने यह संदेश दिया कि भगवान अपने भक्तों ही नहीं, बल्कि दुष्टों का भी कल्याण करते हैं।
इसके पश्चात गर्गाचार्य जी द्वारा भगवान श्रीकृष्ण के नामकरण संस्कार की कथा सुनाई गई, जिसमें उनके विभिन्न नामों के पीछे छिपे आध्यात्मिक अर्थों को विस्तार से समझाया गया। इस प्रसंग ने श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया और पूरा पंडाल “जय श्रीकृष्ण” के उद्घोष से गूंज उठा।
कथा के दौरान वातावरण पूर्णतः भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुजन भावविभोर होकर भगवान की लीलाओं का रसपान करते रहे। अंत में कथा व्यास जी ने सभी को भगवान की भक्ति में लीन रहने और जीवन को धर्ममय बनाने का संदेश दिया।

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